श्री आनंदपुर साहिब में नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित ऐतिहासिक और पवित्र आयोजनों की तैयारियाँ पूरे जोश और श्रद्धा के साथ चल रही हैं। इसी क्रम में, पंजाब के शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार श्री दीपक बाली ने आज तख्त श्री केसगढ़ साहिब में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से विशेष मुलाकात की।
इस भेंट के दौरान शिक्षा मंत्री और सलाहकार ने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को इन पवित्र आयोजनों में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि 23 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में एक “सर्व धर्म सम्मेलन” आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य श्री गुरु तेग बहादुर जी के अमर संदेश — शांति, भाईचारा और सभी धर्मों की रक्षा — को विश्वभर में फैलाना है।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर है जो पूरी मानवता को एकता और सद्भाव के सूत्र में बाँधेगा। उन्होंने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत ने न केवल सिख समुदाय, बल्कि पूरे मानव समाज को यह सिखाया कि धर्म और मानवता की रक्षा के लिए किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटना चाहिए।
बैठक के दौरान मंत्री बैंस ने जत्थेदार को राज्य सरकार की तैयारियों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार श्री आनंदपुर साहिब और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य कर रही है। इनमें सड़कों का नवीनीकरण, यात्री सुविधाओं में सुधार, सुरक्षा प्रबंध, स्वच्छता और लाइटिंग सिस्टम जैसे कई प्रोजेक्ट शामिल हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाली संगत को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
श्री बैंस ने कहा, “हमारी सरकार इस ऐतिहासिक अवसर को भव्य और यादगार बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे युवाओं को गुरु साहिब के जीवन से प्रेरणा लेने का एक शानदार अवसर भी देगा।”
उन्होंने आगे कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 350 साल पहले था। उनकी शिक्षाएँ हमें सिखाती हैं कि सच्चा धर्म मानवता की सेवा और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहना है।
