एल-नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जो तब बनती है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां एल-नीनो का प्रभाव अक्सर मानसून और तापमान में बदलाव के रूप में दिखाई देता है।
2026 में कमजोर मानसून की आशंका
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में एल-नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है। इसी वजह से भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। हाल के मौसम पूर्वानुमानों में देश में औसत से कम वर्षा होने की आशंका जताई गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष मानसूनी बारिश पिछले 11 वर्षों में सबसे कम स्तर तक पहुंच सकती है।
खेती पर पड़ सकता है सीधा असर
भारत की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और देश की लगभग आधी कृषि भूमि वर्षा पर आधारित है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो धान, दालें, मक्का, कपास और तिलहन जैसी फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है, जिससे खेती की लागत बढ़ने की संभावना रहती है।
बढ़ सकती हैं गर्मी और हीटवेव
एल-नीनो का एक बड़ा प्रभाव तापमान में बढ़ोतरी के रूप में भी देखा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके दौरान भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ सकती है। लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव लोगों के स्वास्थ्य, बिजली की मांग और जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। कई राज्यों में पहले से ही तेज गर्मी दर्ज की जा रही है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं।
पानी और बिजली की चुनौती
कम बारिश का असर नदियों, जलाशयों और भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है। यदि मानसून अपेक्षा से कम रहता है तो कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। वहीं जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भी पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, इसलिए बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
महंगाई पर भी पड़ सकता है प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। यदि फसलों का उत्पादन घटता है तो अनाज, दाल, सब्जियां और खाद्य तेल महंगे हो सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ आर्थिक रिपोर्टों में खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।
हर एल-नीनो वर्ष एक जैसा नहीं होता
हालांकि एल-नीनो अक्सर कमजोर मानसून से जुड़ा होता है, लेकिन हर बार इसका प्रभाव समान नहीं रहता। भारतीय महासागर की परिस्थितियां, स्थानीय मौसम तंत्र और अन्य जलवायु कारक भी मानसून को प्रभावित करते हैं। इसलिए विशेषज्ञ लगातार समुद्री तापमान और मौसमीय संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आने वाले महीनों का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सके।
