पंजाब इन दिनों बाढ़ की बड़ी मार झेल रहा है। सतलुज नदी उफान पर है और इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में पानी भर गया है। फिरोजपुर जिले की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। यहां करीब 100 गांव पानी में डूबे हुए हैं। खेतों में लगी फसलें नष्ट हो चुकी हैं और लोगों के घर चारों तरफ से पानी में घिर गए हैं।
लोगों की जिंदगी पर असर
गांवों की गलियां और खेत तालाब जैसे दिख रहे हैं। कालू वाला, जलोके, चांदी वाला, रुकने वाला और कई अन्य गांवों में लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ा है। कई जगह परिवार अपने पशुओं और सामान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते पानी के कारण हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
मदद के लिए आगे आए नौजवान
मुश्किल समय में इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिल रही है। श्री मुक्तसर साहिब और फिरोजपुर के नौजवान समाजसेवी संगठनों के साथ मिलकर राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। कोई सूखा राशन दे रहा है, कोई दवाइयां और कोई लंगर लेकर प्रभावित परिवारों तक पहुंच रहा है। बारिश और पानी की परवाह किए बिना ये टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।
बाढ़ का दायरा और बढ़ा
फिरोजपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। भाखड़ा, पौंग और रणजीत सागर बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण 10 जिलों में करीब 900 गांव प्रभावित हो चुके हैं। इनमें से 300 गांवों में हालात बेहद खराब हैं, जहां 5 से 8 फीट तक पानी भर गया है।
किसानों पर सबसे बड़ी मार
किसानों के लिए यह बाढ़ किसी बड़ी विपत्ति से कम नहीं है। धान और कपास की खड़ी फसलें पानी में डूबकर खराब हो गई हैं। हजारों एकड़ जमीन पर मेहनत से बोई गई फसल अब बर्बाद हो चुकी है। कई किसानों के लिए यह उनकी सालभर की आमदनी का बड़ा नुकसान है।
हालात अब भी चुनौतीपूर्ण
गांवों में पानी भरने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है, वहीं बाकी लोग राहत सामग्री पर निर्भर हैं। प्रशासन और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल पानी घटने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
सतलुज नदी का उफान पंजाब के लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि, संकट की इस घड़ी में नौजवान और समाजसेवी संगठन उम्मीद की किरण बने हुए हैं। उनकी कोशिशें दिखाती हैं कि मुसीबत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, एकजुटता से उसका सामना किया जा सकता है।
