भारत और रूस के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार (21 अगस्त 2025) को रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने साफ कहा कि रूस से भारत को तेल और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति निरंतर जारी है और भविष्य में एलएनजी (Liquified Natural Gas) निर्यात की भी संभावनाएँ मजबूत हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीद पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। बावजूद इसके, भारत और रूस दोनों ही देश अपने संबंधों को और मज़बूत करने पर जोर दे रहे हैं।
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक
दरअसल, यह घोषणा भारत-रूस के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक-तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की 26वीं बैठक में हुई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता रूसी उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की।
जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचे हैं और इसी क्रम में दोनों देशों के बीच गहन वार्ता हुई।
ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी
मंटुरोव ने बैठक के दौरान कहा,
“हम भारत को कच्चा तेल, तेल उत्पाद, तापीय ईंधन और कोयले का निर्यात पहले से कर रहे हैं। अब हम एलएनजी के निर्यात की संभावना भी देख रहे हैं। इसके अलावा, हम शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं।’’
उन्होंने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि इस परियोजना में हुए सफल अनुभव के आधार पर भविष्य की योजनाएँ और बड़ी होंगी।
राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन
बैठक में एक और अहम मुद्दा सामने आया—व्यापार भुगतान प्रणाली। मंटुरोव ने जानकारी दी कि वर्तमान में भारत और रूस के बीच होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक लेन-देन राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। इसका मकसद है कि दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करें और आपसी व्यापार को अधिक सुगम बनाएं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में यह कदम बहुत जरूरी है ताकि किसी तरह की रुकावट या दबाव का असर भारत-रूस संबंधों पर न पड़े।
भारत की ओर से संदेश
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“हमने व्यापार, कृषि, ऊर्जा, उद्योग, कौशल विकास, शिक्षा और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में विस्तृत चर्चा की। मुझे विश्वास है कि इस बैठक के परिणाम हमारी ऐतिहासिक साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे।”
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत-रूस नेताओं का वार्षिक शिखर सम्मेलन निकट है और आज की बैठक उस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
साझेदारी को नई ऊँचाई
बैठक के अंत में जयशंकर और मंटुरोव ने IRIGC-TEC सत्र के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। इसका आधिकारिक विवरण बाद में दोनों सरकारों द्वारा जारी किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और भारत की यह गहरी साझेदारी न केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित रहेगी, बल्कि विज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊँचाई पर ले जाएगी।
भारत और रूस दशकों से करीबी साझेदार रहे हैं। मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भी दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। तेल और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी और रूस के लिए एशियाई बाज़ारों में नई संभावनाएँ खुलेंगी।
मॉस्को और नई दिल्ली का यह भरोसा इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंध और भी मजबूत होंगे और यह साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरेगी।
