भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर पर तंज कसा। IIT मद्रास में बोलते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल लड़ाई ही नहीं, बल्कि नैरेटिव मैनेजमेंट भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि आप हारे या जीते, तो वह कहेगा कि मेरे आर्मी चीफ फील्ड मार्शल बन गए हैं। जरूर हम जीते होंगे, तभी तो वो फील्ड मार्शल बने।”
पाकिस्तानी सेना प्रमुख का प्रमोशन
जनरल द्विवेदी की यह टिप्पणी पाकिस्तान सरकार के हालिया फैसले पर थी, जिसमें पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर को फाइव-स्टार जनरल और फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया। यह कदम पाकिस्तान में बड़े राजनीतिक और सैन्य संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन भारत ने इसे अलग नजरिए से लिया है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद की अहम बैठक
सेना प्रमुख ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था। इसके अगले दिन, 23 अप्रैल को शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की अहम बैठक हुई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “बस, अब बहुत हो चुका।”
तीनों सेनाओं को मिला ‘फ्री हैंड’
जनरल द्विवेदी के अनुसार, इस बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख इस बात पर सहमत हुए कि अब कुछ बड़ा कदम उठाना जरूरी है। सरकार ने सेनाओं को पूरा फ्री हैंड देते हुए कहा कि वे खुद तय करें कि क्या कार्रवाई करनी है। सेना प्रमुख ने कहा कि इस तरह का भरोसा, स्पष्ट राजनीतिक दिशा और समर्थन पहली बार देखने को मिला, जिससे सैनिकों का मनोबल कई गुना बढ़ गया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत
इस बैठक के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। यह ऑपरेशन पहलगाम हमले के जवाब में था, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया।
100 से अधिक आतंकियों का सफाया
इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया। इसके अलावा आतंकियों के ठिकानों, हथियारों के जखीरे और प्रशिक्षण कैंपों को भी तबाह कर दिया गया। सेना प्रमुख के मुताबिक, यह कार्रवाई आतंकवादियों के लिए करारा संदेश है कि भारत किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा।
सैनिकों के मनोबल पर असर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सरकार की ओर से मिला स्पष्ट समर्थन सैनिकों को मैदान में निर्णायक कदम उठाने की ताकत देता है। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में भी सेना किसी भी खतरे का डटकर सामना करेगी और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
