उत्तराखंड इस समय जल-तांडव के भयावह दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच दिनों से पहाड़ लगातार आपदा का सामना कर रहे हैं। बादल फटने और भारी बारिश ने यहां तबाही मचा दी है। प्रकृति के इस प्रचंड प्रहार का सबसे बड़ा साक्ष्य अब हर्षिल झील के रूप में सामने आया है, जिसने इलाके का भूगोल बदलकर रख दिया है।
बादल फटने से बनी अनचाही झील
बादल फटने के बाद बेहिसाब बारिश हुई, जिससे पहाड़ दरक गए और चट्टानें टूटकर नीचे गिरीं। इन मलबों ने नदी के बीच एक प्राकृतिक बांध बना दिया। गंगोत्री हिमनद से निकलने वाली भागीरथी नदी का बहाव रुक गया और पीछे का पानी जमा होता चला गया। नतीजा यह हुआ कि करीब तीन किलोमीटर लंबी एक नई झील बन गई, जिसे अब ‘हर्षिल झील’ कहा जा रहा है।
सेना कैंप और हाईवे पर असर
इस झील के बनने से धराली और हर्षिल के लोगों की चिंता बढ़ गई है। झील के पास स्थित सेना कैंप के कई हिस्से पानी में डूब चुके हैं। इतना ही नहीं, गंगोत्री नेशनल हाईवे का भी एक बड़ा हिस्सा पानी में समा गया है। इससे न केवल सैन्य गतिविधियों में बाधा आई है, बल्कि स्थानीय लोगों की आवाजाही भी ठप हो गई है।
बढ़ता खतरा और डर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर झील में पानी का दबाव बढ़ा और अचानक मलबा हट गया तो एक बार फिर से धराली और हर्षिल में बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। यह स्थिति खास तौर पर डराने वाली इसलिए है क्योंकि यह इलाका पहले से ही भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित रहा है।
लोगों में दहशत, प्रशासन अलर्ट
स्थानीय लोग झील को देखकर हैरान और डरे हुए हैं। उनका कहना है कि यह पानी कब और कैसे उफान मार देगा, यह कोई नहीं जानता। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए गए हैं। फिलहाल, विशेषज्ञ टीमें पानी के बहाव और दबाव की निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
