अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा असर डाला है। कई महीनों से जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर लगी रुकावटों के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। अब दोनों देशों के बीच समझौते की खबर आते ही निवेशकों ने राहत की सांस ली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल
समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गई, जो पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड में भी गिरावट देखने को मिली। बाजार को उम्मीद है कि ईरान से तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य होने लगेगी, जिससे वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।
दो महीने बाद फिर रवाना हुए तेल टैंकर
फरवरी से जारी संघर्ष और समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान के कई तेल टैंकर फंसे हुए थे। अब समझौते के बाद कुछ टैंकरों ने फिर से अपनी यात्रा शुरू कर दी है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई सप्ताह लग सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध और तनाव के दौरान इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। अब इसके दोबारा खुलने की संभावना ने बाजार को राहत दी है।
शेयर बाजारों में भी दिखा सकारात्मक असर
तेल की कीमतों में गिरावट का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के कई शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि सस्ता कच्चा तेल परिवहन और उत्पादन लागत को कम करेगा, जिससे महंगाई पर भी कुछ दबाव घट सकता है। भारत सहित कई देशों के बाजारों में सकारात्मक माहौल देखा गया।
अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई स्थिति
हालांकि समझौते ने राहत जरूर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तेल बाजार तुरंत सामान्य नहीं होगा। कई जहाज अब भी प्रतीक्षा में हैं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कुछ मुद्दे बने हुए हैं। इसके अलावा युद्ध के दौरान प्रभावित हुई आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह बहाल होने में समय लग सकता है। इसी वजह से आने वाले हफ्तों में तेल बाजार पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
