श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी और तख्त श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब के जथेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने चंडीगढ़ विवाद को लेकर सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब के अधिकारों पर किसी भी तरह का हमला कभी सहन नहीं किया जाएगा। जथेदार गर्गज्ज का यह बयान ऐसे समय आया है जब चंडीगढ़ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
धार्मिक आज़ादी के पवित्र दिन पर जताई चिंता
जथेदार साहिब ने कहा कि जिस दिन देश श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को याद कर रहा है, उस दिन पंजाब के अधिकारों को खतरे में डालना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन दे दिया था, और आज इसी पवित्र अवसर पर पंजाब के हकों पर सवाल उठाना सही नहीं है।
“चंडीगढ़ यूं ही नहीं बना, इसकी जड़ें पंजाब से जुड़ी हैं”
जथेदार गर्गज्ज ने जोर देकर कहा कि चंडीगढ़ हवा में नहीं बना, बल्कि पंजाब के कई गांवों को उजाड़कर बसाया गया शहर है। इसलिए इसकी पूरी ऐतिहासिक विरासत और मालिकाना हक पंजाब से ही जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ सिख समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब का है। पंजाब में सिख, हिंदू और मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं और चंडीगढ़ सबका साझा शहर है।
“पंजाब को हल्का मत समझो, यह लोहे के चने हैं”
जथेदार साहिब ने चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब कोई ऐसी जगह नहीं जिसे मनमर्जी से काट दिया जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब “लोहे के चने” की तरह है, जिसे चबाया नहीं जा सकता। चंडीगढ़ पर अधिकार कम करने या कानूनों में बदलाव कर पंजाब के अधिकार छीनने की किसी भी कोशिश का उन्होंने कड़ा विरोध किया।
इतिहास का हवाला देकर दिया बड़ा संदेश
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जो लोग सिखों को दबाने की कोशिश करते हैं, उनकी सत्ता ज्यादा समय तक नहीं टिकती। सिख समुदाय हमेशा भाईचारे, प्रेम और शांति का संदेश देता है, लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कभी भी पीछे नहीं हटता।
“चंडीगढ़ पर किसी और का हक बनता ही नहीं”
अंत में जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने स्पष्ट कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी था, है और हमेशा रहेगा। इस पर किसी दूसरी पार्टी या राज्य का अधिकार नहीं बनता। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब के अधिकारों का उल्लंघन करने वाली किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
