राज्यसभा में आज भी “ऑपरेशन सिंदूर” पर बहस जारी रही। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का स्पष्ट और निर्णायक जवाब है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने इस हमले के तुरंत बाद महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक निर्णय लिए।
सिंधु जल संधि पर लिया गया ऐतिहासिक फैसला
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, और यह तब तक प्रभावी रहेगा जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह से बंद नहीं करता। उन्होंने दो टूक कहा, “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” जयशंकर ने सिंधु समझौते को “अद्वितीय” बताते हुए कहा कि शायद दुनिया में कहीं और ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां एक देश ने अपनी प्रमुख नदियों का जल बिना अधिकार दिए दूसरे देश को प्रवाहित होने दिया हो।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त रणनीति
जयशंकर ने कहा कि भारत ने लंबे समय से सीमापार आतंकवाद का दर्द झेला है, और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमने यह संदेश दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ नरमी नहीं बरतेगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की “साफ और स्पष्ट नीति” का हिस्सा है, जिसके तहत भारत ने हर मंच पर पाकिस्तान को बेनकाब किया है और कठोर निर्णय लिए हैं।
पहलगाम हमला: आतंक की इंतहा
विदेश मंत्री ने पहलगाम हमले को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की हत्या की गई थी। उन्होंने कहा कि हमलावरों ने पहले लोगों की धार्मिक पहचान पूछी और फिर गोलीबारी की, जो मानवता के खिलाफ घिनौना कृत्य है। इस हमले ने रेखा पार कर दी, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया।
सरहदें सील और सुरक्षा समिति की तत्काल बैठक
जयशंकर ने बताया कि हमले के तुरंत बाद, केंद्र सरकार की सुरक्षा मामलों की समिति की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें कई कड़े फैसले लिए गए। अटारी बॉर्डर को बंद करने जैसा कदम भी इसी रणनीति का हिस्सा था। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक दबाव भी बढ़ाया।
पाकिस्तान से बातचीत का अब कोई अर्थ नहीं
विदेश मंत्री ने कहा कि 1947 से भारत पर सीमापार हमले होते रहे हैं और हर बार हमले के बाद पाकिस्तान से बातचीत हुई, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। “अब सिर्फ बातचीत से समाधान नहीं होगा। ठोस कार्रवाई ज़रूरी है,” उन्होंने कहा।
आतंकी दोषियों की वापसी पर भी बड़ी कामयाबी
जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाने में सफलता प्राप्त की है। यह दिखाता है कि अब भारत आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ निंदा नहीं, बल्कि प्रभावी और निर्णायक कदम उठा रहा है।
भारत का रुख अब निर्णायक
राज्यसभा में जारी चर्चा में विदेश मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। चाहे वह सिंधु जल संधि का निलंबन हो, सरहदों का बंद होना, या आतंकवादियों की गिरफ्तारी — भारत ने हर मोर्चे पर मजबूत संदेश दिया है।
