बिजली चोरी और बिजली के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पावरकॉम जालंधर सर्कल ने एक व्यापक अभियान चलाया है। इस अभियान के दौरान बिजली चोरी के 12 मामले पकड़े गए और संबंधित खपतकर्ताओं पर 12.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों ने बताया कि बिजली चोरी के साथ-साथ घरेलू बिजली का वाणिज्यिक उपयोग और गलत खपत के 24 मामले सामने आए, जिनमें कुल 13.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
चीफ इंजीनियर देसराज बांगड़ के निर्देशों पर, डिप्टी चीफ इंजीनियर और सर्कल हेड गुलशन चुतानी ने जालंधर सर्कल की पांचों डिवीजनों को चेकिंग के निर्देश दिए। अभियान में कुल 28 टीमें बनाई गईं और विभिन्न इलाकों में छापेमारी की गई।
इंचार्ज गुलशन चुतानी ने बताया कि एक्सियन, एसडीओ, एजेई और जेई की अगुवाई में टीमें फील्ड में भेजी गईं, और इसके तहत विभाग ने 24 मामले पकड़ने में सफलता हासिल की। खासतौर पर मॉडल टाउन डिवीज़न ने इस मामले में सबसे अधिक जुर्माना वसूला। एक्सियन इंजीनियर जस्पाल सिंह पाल के नेतृत्व में 314 कनेक्शनों की जांच की गई, जिसमें बिजली चोरी के 8 मामले पकड़े गए और खपतकर्ताओं पर 9.49 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सबसे अधिक 534 कनेक्शनों की जांच वेस्ट डिवीजन में की गई। एक्सियन सन्नी भांगड़ा के नेतृत्व में इस डिवीजन में 1 मामला पकड़ा गया और 5 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। वहीं, ईस्ट डिवीजन में 280 कनेक्शनों की जांच की गई, जिसमें बिजली चोरी के 2 और गलत इस्तेमाल के 1 मामले पकड़े गए, और कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
कैंट डिवीजन के एक्सियन अवतार सिंह ने 275 कनेक्शनों की जांच कर 6 खपतकर्ताओं पर 1.39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। फगवाड़ा डिवीजन में एक्सियन हरदीप कुमार ने 237 कनेक्शनों की चेकिंग की, जिसमें एक बिजली चोरी का मामला पकड़ते हुए 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इंचार्ज गुलशन चुतानी ने बताया कि गलत इस्तेमाल, अधिक लोड पर कम बिजली का उपयोग और घरेलू बिजली का वाणिज्यिक उपयोग अन्य खपतकर्ताओं के लिए भी परेशानी का कारण बनता है। इससे ट्रांसफार्मर और लाइनें ओवरलोड हो जाती हैं और बिजली के फॉल्ट बढ़ जाते हैं।
उन्होंने सभी खपतकर्ताओं से अपील की कि वे तुरंत अपने लोड का सही मूल्यांकन करें। उन्होंने चेताया कि ऐसा न करने पर विभाग सख्त कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना वसूल सकता है।
यह अभियान जालंधर सर्कल में बिजली चोरी रोकने और सही खपत सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है, ताकि ट्रांसफार्मर और लाइनें सुरक्षित रहें और आम नागरिकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।
