बेंगलुरु की एक 18 मंजिला इमारत इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर किसी इमारत को अवैध निर्माण या अदालत के आदेश के बाद गिराया जाता है, लेकिन इस मामले में डेवलपर ने खुद अपनी नई बनी इमारत को तोड़ने का फैसला लिया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि भविष्य में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर किसी तरह का जोखिम न रहे।
सुरक्षा जांच में सामने आई तकनीकी खामी
यह मामला हरलूर रोड स्थित प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट SNN Raj Etternia के ब्लॉक E-3 से जुड़ा है। इस 18 मंजिला टॉवर का निर्माण 2022 में शुरू हुआ था और हाल ही में पूरा हुआ था। इमारत को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) भी मिल चुका था। लेकिन फ्लैट खरीदारों को कब्जा देने से पहले अंतिम सुरक्षा जांच के दौरान वॉटर लोड टेस्ट किया गया। इसी परीक्षण में इंजीनियरों ने इमारत में एक तरफ हल्का झुकाव देखा, जिसके बाद विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आई वजह
जांच के दौरान पता चला कि निर्माण की शुरुआत में मिट्टी की जांच से जुड़े बोरहोल डेटा को समझने में बाहरी तकनीकी सलाहकार से गंभीर चूक हुई थी। इसी कारण इमारत की नींव में संरचनात्मक असंतुलन पैदा हो गया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद डेवलपर ने किसी तरह का जोखिम लेने के बजाय पूरे टॉवर को गिराकर दोबारा बनाने का फैसला किया।
49 परिवारों पर पड़ा असर
इस टॉवर में कुल 49 प्रीमियम फ्लैट थे और सभी की बिक्री हो चुकी थी। कई खरीदार अपने नए घर में शिफ्ट होने की तैयारी कर चुके थे। कुछ लोगों ने पुराने मकान खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जबकि कई परिवार अपने होम लोन की किस्तें भी चुका रहे थे। अब उन्हें नए निर्माण तक इंतजार करना पड़ेगा।
सुरक्षा को दी सबसे बड़ी प्राथमिकता
पूरे प्रोजेक्ट में 15 टॉवर और 972 फ्लैट शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश परिवार पहले ही अपने घरों में रह रहे हैं। डेवलपर ने स्पष्ट किया है कि बाकी सभी टॉवर सुरक्षित हैं और केवल प्रभावित टॉवर को दोबारा बनाया जाएगा। करीब 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाने के बावजूद कंपनी ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए सिरे से निर्माण करने का निर्णय लिया है, जिसे निर्माण क्षेत्र में जिम्मेदारी और गुणवत्ता के प्रति एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
