जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह कदम डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के अनुरूप उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उठाया गया। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन लंबे उपवास और शरीर में पानी की कमी के कारण उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत है।
मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार को घेरा
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतिहास में मुगल शासकों और अंग्रेजों द्वारा विरोध की आवाज को दबाने की बातें सुनी थीं, लेकिन आज़ाद भारत में ऐसा नहीं होना चाहिए। सिसोदिया ने सवाल उठाया कि यदि भारत लोकतांत्रिक देश है, तो शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले युवाओं की आवाज को इतनी सख्ती से क्यों दबाया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
दिल्ली पुलिस का क्या है पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर थे और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी थी। पुलिस के अनुसार, पूरी कार्रवाई चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और न्यायालय के निर्देशों के तहत की गई, ताकि उनकी सेहत को कोई गंभीर नुकसान न पहुंचे।
मामले पर लगातार बढ़ रही राजनीतिक हलचल
सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल प्रदर्शनकारी की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
