फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta अमेरिका के टेनेसी राज्य में एक बड़े कानूनी मुकदमे का सामना कर रही है। राज्य सरकार का आरोप है कि इंस्टाग्राम को इस तरह तैयार किया गया कि किशोर और बच्चे लंबे समय तक ऐप पर बने रहें। सरकार का कहना है कि इससे युवाओं की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ा और कंपनी ने इसके संभावित खतरों की पूरी जानकारी लोगों से साझा नहीं की।
Meta पर क्या हैं आरोप?
टेनेसी के अटॉर्नी जनरल का दावा है कि Meta के पास ऐसे आंतरिक शोध मौजूद थे जिनमें बताया गया था कि इंस्टाग्राम का अत्यधिक इस्तेमाल किशोरों में चिंता, तनाव और अन्य मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकता है। आरोप है कि कंपनी ने इन जानकारियों के बावजूद प्लेटफॉर्म में ऐसे फीचर जारी रखे जो लोगों को बार-बार ऐप खोलने और लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।
किन फीचर्स पर उठे सवाल?
मुकदमे में इंस्टाग्राम के कई लोकप्रिय फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें ऑटोप्ले वीडियो, रील्स, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और ऐसा कंटेंट शामिल है जो कुछ समय बाद गायब हो जाता है। राज्य सरकार का कहना है कि ये फीचर उपयोगकर्ताओं का ध्यान लंबे समय तक बांधे रखते हैं और खासतौर पर कम उम्र के बच्चों को अधिक प्रभावित करते हैं।
Meta ने क्या दिया जवाब?
Meta ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने किशोरों की सुरक्षा के लिए कई सुरक्षा फीचर और पैरेंटल कंट्रोल उपलब्ध कराए हैं। Meta का दावा है कि वह लंबे समय से उम्र के अनुसार सुरक्षा उपाय लागू कर रही है ताकि युवा उपयोगकर्ता सोशल मीडिया का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
फैसले का असर दुनिया भर में पड़ सकता है
यह मामला केवल टेनेसी तक सीमित नहीं है। अमेरिका के कई अन्य राज्यों और हजारों लोगों ने भी Meta के खिलाफ इसी तरह के मुकदमे दायर किए हैं। यदि अदालत राज्य सरकार के पक्ष में फैसला देती है, तो Meta पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है और इंस्टाग्राम के कुछ फीचर्स में बदलाव करने का आदेश भी दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियों और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियमों पर पड़ सकता है।
