पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस को हाल ही में श्री अकाल तख़त साहिब द्वारा धार्मिक सजा दी गई थी। इस सजा के तहत, उन्हें दो दिनों तक धार्मिक सेवा करने का निर्देश दिया गया था। मंत्री हरजोत बैंस ने अपनी सजा को पूरा करने के लिए श्री आनंदपुर साहिब स्थित गुरुद्वारा सीसगंज साहिब में सेवा की।
सजा के तहत की गई सेवा
धार्मिक सजा के तहत, हरजोत बैंस को गुरु घरों के रास्तों को साफ करने, गुरु घर के जोड़ घर में सेवा, कीर्तन और पाठ सुनने जैसी धार्मिक सेवाएं करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने अपनी पहली दिन की सेवा दिल्ली के सीसगंज साहिब गुरुद्वारे में की और दूसरे दिन अपनी सेवा श्री आनंदपुर साहिब के सीसगंज साहिब गुरुद्वारे में की।
सेवा करने से पहले, हरजोत बैंस ने गुरुद्वारा सीसगंज साहिब में नतमस्तक होकर माथा टेका और सरबत के भले के लिए अरदास की। इस दौरान उन्होंने अपने द्वारा हुई गलती के लिए गुरु साहिब से माफी भी मांगी। इसके बाद, उन्होंने गुरु घर में सेवा करना शुरू किया और दो दिनों तक यह सेवा पूरी की।
मामला गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ा
यह मामला नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ से जुड़ा हुआ है। पंजाब सरकार ने इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किए थे, जिसमें गायक वीर सिंह ने गीत प्रस्तुत किया और कुछ लोगों ने उस पर नृत्य भी किया। यह कार्यक्रम पंजाबी भाषा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था, जो मंत्री हरजोत बैंस के अधीन आता है।
धार्मिक सजा का निर्णय
सिख धर्म में सम्मान और अनुशासन बनाए रखने के लिए अकाल तख़त साहिब समय-समय पर सजा देता है, जो सिख समुदाय के अनुशासन को मजबूत करने का काम करता है। इस बार, जब मंत्री हरजोत बैंस को अकाल तख़त साहिब द्वारा तलब किया गया, तो उन्हें धार्मिक सजा दी गई थी। इस सजा के तहत उन्हें दो दिन तक धार्मिक सेवा करने के लिए कहा गया, और उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ इस सजा का पालन किया।
मंत्री हरजोत बैंस ने अपने कार्यकाल में पंजाबी संस्कृति और भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें हमेशा सिख धर्म और पंजाब की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। इस धार्मिक सेवा के दौरान, उनके द्वारा की गई अरदास और माफी ने सिख धर्म की सच्ची निष्ठा और समर्पण को दर्शाया है।
मंत्री हरजोत बैंस ने यह भी कहा कि वह पंजाबी समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए हमेशा समर्पित रहेंगे और गुरु साहिब के मार्गदर्शन में हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। उन्होंने इस अवसर पर पंजाबी भाषा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना भी की और सिख धर्म के अनुशासन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
