देश के कई हिस्सों में मानसून अब तेजी से सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के अनेक राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान हल्की से लेकर भारी बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की संभावना जताई गई है। मौसम में आए इस बदलाव से कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में मानसून की दस्तक
दिल्ली-एनसीआर में भी मानसून ने अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाने, मध्यम से भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। लंबे समय से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को बारिश के कारण राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में बढ़ेगी बारिश
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भी मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने बताया है कि 5 से 8 जुलाई के बीच पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। पहाड़ी राज्यों में भी वर्षा की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं।
पूर्वी और मध्य भारत में भी असर
बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। लगातार वर्षा के कारण नदियों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। कई जगहों पर बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में बारिश जारी
महाराष्ट्र, गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के कई हिस्सों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय है। पश्चिमी तट और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कई स्थानों पर तेज वर्षा और आंधी की संभावना जताई है।
जुलाई में बारिश का कैसा रहेगा रुख
मौसम विभाग के मासिक अनुमान के अनुसार जुलाई महीने में पूरे देश में औसत बारिश सामान्य से थोड़ी कम रह सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर क्षेत्र और कुछ अन्य इलाकों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होने के संकेत हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की आगे की प्रगति और कम दबाव वाले क्षेत्रों की सक्रियता के अनुसार अलग-अलग राज्यों में बारिश का स्वरूप बदलता रहेगा।
