नवरात्रि से पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) की नई दरों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। ये दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें सस्ती हो जाएंगी।
गौरतलब है कि 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक में इन बदलावों पर सहमति बनी थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
क्या हुआ बड़ा बदलाव?
2017 में जब GST लागू हुआ था, तब वस्तुओं और सेवाओं को चार अलग-अलग दरों में बांटा गया था – 5%, 12%, 18% और 28%। अब सरकार ने इस ढांचे को सरल बना दिया है।
- नई व्यवस्था के तहत सिर्फ दो स्लैब रहेंगे – 5% और 18%।
- जो वस्तुएं और सेवाएं पहले 28% स्लैब में आती थीं, उनमें से अधिकतर को अब 18% स्लैब में डाल दिया गया है।
- वहीं, 12% वाले स्लैब की कई वस्तुएं अब 5% पर मिलेंगी।
- हानिकारक और विलासिता (Luxury) की वस्तुओं को खास तौर पर अलग कर दिया गया है। इन्हें अब 28% से बढ़ाकर 40% के विशेष स्लैब में रखा गया है।
इस बदलाव के बाद कई सामान्य वस्तुएं और सेवाएं सस्ती होंगी, जिससे सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा।
लोगों को क्या फायदा होगा?
नई दरों का असर आम जीवन पर साफ दिखाई देगा।
- रोजमर्रा के कई सामान, जिन पर अब तक ज्यादा टैक्स लगता था, वे सस्ते हो जाएंगे।
- मध्यम वर्गीय परिवारों का खर्च कम होगा।
- छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी फायदा होगा क्योंकि टैक्स स्लैब कम होने से बिक्री बढ़ने की संभावना है।
- 18% स्लैब में आने वाली वस्तुओं की संख्या घटने और 5% स्लैब में बढ़ने से लोगों की जेब पर दबाव कम होगा।
हालांकि, शराब, सिगरेट जैसी हानिकारक वस्तुएं और महंगे लग्जरी आइटम अब महंगे होंगे क्योंकि इन्हें 40% टैक्स वाले नए स्लैब में रखा गया है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार ने यह निर्णय उस समय लिया है जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। इस कारण भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। ऐसे समय में सरकार ने जीएसटी ढांचे को सरल कर लोगों और कारोबारियों को राहत देने की कोशिश की है।
इसके साथ ही निर्यातकों को भी कुछ प्रोत्साहन दिए गए हैं ताकि वे विदेशी बाजार में टिके रह सकें।
क्या होगा आगे?
22 सितंबर से नई दरें लागू होंगी। इसके बाद राज्य सरकारें भी अपनी अधिसूचनाएं जारी करेंगी ताकि यह बदलाव पूरे देश में समान रूप से लागू हो सके।
वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी राहत मिलेगी। वहीं, सरकार को उम्मीद है कि टैक्स दरें घटने से खरीदारी और खपत बढ़ेगी, जिससे बाजार में रौनक लौटेगी।
केंद्र सरकार का यह निर्णय त्योहारों से पहले आम जनता के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब रोजमर्रा की कई चीजें सस्ती मिलेंगी, जिससे उपभोक्ताओं का बोझ कम होगा। वहीं, महंगे लग्जरी और हानिकारक सामान पर ज्यादा टैक्स लगाकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुविधा और जरूरत की चीजों पर राहत मिलेगी, लेकिन दिखावे और नुकसानदेह वस्तुओं को किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
