न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुने गए जोहरान ममदानी ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के बाद भी अपने तेवर ढीले नहीं किए हैं। हालाँकि दोनों नेताओं के बीच बातचीत काफी सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन ममदानी ने साफ कहा कि इससे उनकी राजनीतिक राय में कोई बदलाव नहीं आया।
रविवार (23 नवंबर) को एक टीवी इंटरव्यू के दौरान ममदानी ने दो-टूक कहा कि उनके नजरिए में आज भी डोनाल्ड ट्रंप एक “फासिस्ट” हैं और अमेरिकी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
पुराना बयान बरकरार: “मैंने जो कहा था, आज भी वही सोचता हूँ”
NBC के लोकप्रिय शो Meet The Press में उनसे पूछा गया कि क्या वे अभी भी ट्रंप को फासिस्ट मानते हैं। इस सवाल पर ममदानी ने बिना किसी झिझक के कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने जो बोला, वह आज भी सौ प्रतिशत सच है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद होने पर अपने विचार बदलने की कोई वजह नहीं है, और वे अपने बयान पर कायम हैं।
चुनाव अभियान में तीखी जुबानी जंग
मेयर चुनाव के दौरान ट्रंप और ममदानी के बीच बड़े स्तर पर बयानबाज़ी देखने को मिली थी।
- ट्रंप ने ममदानी को “पागल कम्युनिस्ट” कहा था और दावा किया था कि वह न्यूयॉर्क जैसे शहर में कभी जीत नहीं सकते।
- जवाब में ममदानी ने ट्रंप को “फासिस्ट और तानाशाही मानसिकता वाला नेता” बताया था।
दोनों के बीच यह तकरार चुनाव खत्म होने तक लगातार चर्चा में रही।
व्हाइट हाउस मुलाकात: माहौल बदला, लेकिन राय नहीं
मेयर चुने जाने के बाद जब ममदानी पहली बार व्हाइट हाउस पहुँचे, तो माहौल पहले से बिल्कुल अलग नजर आया। ओवल ऑफिस में ट्रंप ने मीडिया के सामने ममदानी की तारीफ कर सभी को हैरान कर दिया।
बताया जाता है कि मुलाकात के दौरान दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई और कई स्थानीय मुद्दों पर चर्चा भी चली।
बैठक को बताया “उपयोगी और सार्थक”
ममदानी ने मुलाकात को “प्रोडक्टिव” बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान बार-बार वही मुद्दे उठे जो उनके चुनाव प्रचार का मुख्य केंद्र थे —
- महंगी हाउसिंग
- बच्चों की देखभाल का बढ़ता खर्च
- रोजमर्रा की जरूरतों, जैसे ग्रॉसरी की कीमतों में तेजी
- यूटिलिटी बिलों का बढ़ता बोझ
उन्होंने कहा कि ओवल ऑफिस में चर्चा सकारात्मक थी, लेकिन इससे उनके राजनीतिक विचारों में कोई बदलाव नहीं आया।
ट्रंप और ममदानी की मुलाकात भले ही दोस्ताना माहौल में हुई हो, लेकिन दोनों नेताओं की वैचारिक दूरी अब भी वैसी ही बनी हुई है। ममदानी का कहना है कि बातचीत अच्छी हो सकती है, लेकिन लोकतंत्र से जुड़े सवालों पर वे समझौता नहीं कर सकते।
