पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जेलों के अंदर आम आदमी क्लिनिक खोलने का फैसला किया है। यह पहल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मानसिक सहयोग प्रदान करना है।
कैदियों के स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि सरकार चाहती है कि जेलें केवल सज़ा काटने की जगह न रहें, बल्कि “सुधार गृह” के रूप में काम करें।
इसी सोच के तहत, अब जेलों में भी आम आदमी क्लिनिक स्थापित किए जाएंगे, जहां डॉक्टरों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक (Psychologists) और मनोचिकित्सक (Psychiatrists) भी तैनात किए जाएंगे ताकि कैदियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिल सके।
आम आदमी क्लिनिक का सफल मॉडल
पंजाब में पहले से ही 881 आम आदमी क्लिनिक चल रहे हैं, जो राज्यभर के लोगों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
15 अगस्त 2022 से शुरू हुए इस मॉडल के तहत अब तक 4.20 करोड़ से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है, जबकि 2.29 करोड़ से ज्यादा फ्री डायग्नोस्टिक टेस्ट किए गए हैं।
सरकार का दावा है कि इस मॉडल ने लोगों को सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं दी हैं, जिससे अस्पतालों पर बोझ भी कम हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जेलों में मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं आम होती हैं। इसलिए, यह पहल न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि हर कैदी को समाज में दोबारा लौटने का मौका मिलना चाहिए, और इसके लिए उनका मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बहाल होना बेहद ज़रूरी है।
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक — चाहे वह समाज में कहीं भी हो — को बेहतर, मुफ्त और मानवीय स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
यह कदम जेलों को वास्तव में “सुधार गृह” बनाने की दिशा में एक बड़ा और प्रेरणादायक बदलाव माना जा रहा है।
