देश की मेडिकल दुनिया में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। PGI (पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़) के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. राजेश छाबड़ा ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पिछले 7 वर्षों में 1000 से ज्यादा पिट्यूटरी ट्यूमर मरीजों की एंडोस्कोपिक सर्जरी की है — और वो भी बिना खोपड़ी खोले, सीधे नाक के रास्ते से।
यह कारनामा न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में अपने आप में सबसे बड़ी सर्जरी श्रृंखलाओं में से एक माना जा रहा है।
क्या होता है पिट्यूटरी ट्यूमर?
पिट्यूटरी ग्रंथि मटर के दाने जितनी होती है लेकिन इसे “मास्टर ग्रंथि” कहा जाता है क्योंकि यह शरीर के हॉर्मोन संतुलन को नियंत्रित करती है। इस ग्रंथि में ट्यूमर बनने से आंखों की रोशनी पर असर, हॉर्मोनल गड़बड़ी, दिमाग पर दबाव और कई बार जीवन के लिए खतरा भी बन जाता है।
पहले इस ट्यूमर को हटाने के लिए क्रैनियोटॉमी यानी खोपड़ी खोलनी पड़ती थी, जो जोखिम भरा और तकलीफदेह था। लेकिन अब एंडोस्कोपिक तकनीक ने सब कुछ बदल दिया है।
एंडोस्कोपिक सर्जरी की खास बातें
डॉ. छाबड़ा और उनकी टीम द्वारा इस्तेमाल की गई एंडोस्कोपिक तकनीक में:
-
सर्जरी नाक के जरिए की जाती है, यानी बिना कोई बाहरी चीरा या निशान।
-
मरीज को अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है।
-
जल्दी रिकवरी होती है।
-
आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है और
-
हॉर्मोनल संतुलन भी बरकरार रहता है।
डॉ. छाबड़ा का कहना है कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरी PGI टीम की मेहनत का नतीजा है।
पूरी टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस सफलता में कई विशेषज्ञ शामिल रहे, जिनमें न्यूरोसर्जरी के डॉ. अपिंदरप्रीत सिंह, ईएनटी के डॉ. रमनीप विर्क, एंडोक्रिनोलॉजी के डॉ. पिनाकी दत्ता और डॉ. रमा आहलूवालिया, न्यूरोरेडियोलॉजी के डॉ. चिराग कमल आहूजा, और न्यूरोएनेस्थीसिया की डॉ. निधि पांडा की टीम शामिल रही।
यह इंटरडिसिप्लिनरी टीमवर्क ही था जिसने इस मुश्किल काम को इतना आसान बना दिया और भारत को ग्लोबल न्यूरोसर्जरी मैप पर मजबूती से खड़ा कर दिया।
डॉ. छाबड़ा और उनकी टीम की ये ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में प्रेरणा है, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए भी नई उम्मीद है जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
