दिल्ली की हवा एक बार फिर सांसों के लिए खतरा बन गई है। दीपावली के बाद राजधानी का आसमान धुंध से ढक गया और वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई। हर साल की तरह इस बार भी दिवाली की रात पटाखों की आवाज़ों के साथ प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया। आंकड़ों के अनुसार, इस बार दिल्ली की हवा पिछले चार साल में सबसे ज़्यादा प्रदूषित रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, इस साल दिवाली की शाम दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 345 दर्ज किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। तुलना करें तो 2024 में यह 330, 2023 में 218 और 2022 में 312 था। यानी हर साल के मुकाबले इस बार प्रदूषण ने नया रिकॉर्ड बना लिया।
रात भर चली आतिशबाजी, कोर्ट के आदेश की अनदेखी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखे फोड़ने के लिए दो घंटे की तय समयसीमा रखी थी, लेकिन लोगों ने इस नियम की परवाह नहीं की। रात देर तक आतिशबाजी होती रही। इसकी वजह से हवा में धुआं और जहरीले कण भर गए। मंगलवार (21 अक्टूबर) की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में घनी धुंध छाई रही और दृश्यता बहुत कम हो गई।
PM 2.5 स्तर चार साल में सबसे ऊंचा
दिवाली की रात दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 675 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया — यह 2021 के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। आपको बता दें कि पीएम 2.5 बेहद छोटे प्रदूषक कण होते हैं जो फेफड़ों और दिल पर बुरा असर डालते हैं। सुरक्षित सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मानी जाती है, यानी दिल्ली की हवा इससे 10 गुना ज्यादा खराब हो चुकी थी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू
प्रदूषण बढ़ने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसके लिए पटाखों को नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार वाले पंजाब में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पंजाब से उठने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहा है।
वहीं, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सभी सरकारी आंकड़े पूरी तरह सुरक्षित हैं और विभाग की वेबसाइट या ऐप में कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई है।
AQI लगातार ‘रेड जोन’ में
सीपीसीबी के प्रति घंटे जारी बुलेटिन के अनुसार, सोमवार की रात दिल्ली का AQI 344 से बढ़कर 359 तक पहुंच गया और मंगलवार की सुबह तक यही स्तर बना रहा। इसका मतलब यह है कि हवा में सांस लेना बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया था।
स्वास्थ्य पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। इससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
अब सरकार ने कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए “ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)” के तहत कई सख्त कदम उठाए जाएंगे — जैसे निर्माण कार्यों पर रोक, सड़कों पर पानी का छिड़काव और खुले में कूड़ा जलाने पर कार्रवाई।
साफ है कि दिवाली की खुशियां इस बार भी दिल्ली की हवा के साथ धुंधली पड़ गईं। जब तक लोग और सरकार मिलकर गंभीर कदम नहीं उठाते, तब तक “सांस लेना” दिल्लीवालों के लिए हर साल एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
