पंजाब में हर साल पराली जलाने की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। धान कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। इस समस्या से निपटने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य में फसली अवशेष प्रबंधन (सी.आर.एम.) के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आई.ई.सी.) योजना की शुरुआत की गई है।
क्या है इस योजना का उद्देश्य?
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य किसानों, विद्यार्थियों और आम जनता को जागरूक करना है ताकि वे पराली जलाने की बजाय पर्यावरण–अनुकूल तरीकों को अपनाएँ। सरकार चाहती है कि लोगों के व्यवहार में बदलाव आए और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिले।
प्रचार वैन, नाटक और दीवार चित्र
इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने कई गतिविधियाँ तय की हैं। गाँव–गाँव संदेश पहुँचाने के लिए 50 प्रचार वैन चलाई जाएँगी। इसके अलावा, 444 नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएँगे ताकि लोग सांस्कृतिक माध्यम से संदेश समझ सकें। पूरे राज्य में 12,500 दीवार चित्र बनाए जाएँगे, जिनमें पराली जलाने के नुकसान और फसली अवशेष प्रबंधन के फायदे बताए जाएँगे।
किसानों तक सीधी पहुँच
किसानों को सीधे जानकारी देने के लिए 3,333 गाँव–स्तरीय और 296 ब्लॉक–स्तरीय शिविर लगाए जाएँगे। यहाँ विशेषज्ञ किसानों को बताएँगे कि पराली जलाने से बचने के क्या उपाय हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ कैसे लिया जा सकता है।
इसके अलावा, 148 आशा वर्कर गाँव–गाँव जाकर घर–घर लोगों को जागरूक करेंगी। इस तरह हर परिवार तक व्यक्तिगत रूप से संदेश पहुँचाने की तैयारी की गई है।
स्कूली बच्चों की भागीदारी
सरकार चाहती है कि बचपन से ही बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित हो। इसलिए स्कूलों में निबंध लेखन, पेंटिंग और विचार–विमर्श प्रतियोगिताएँ कराई जाएँगी। इससे बच्चों को न केवल जानकारी मिलेगी, बल्कि वे अपने घरों और गाँवों में भी संदेश पहुँचाएँगे।
किसानों को मशीनें और सहयोग
पंजाब सरकार ने बताया कि वर्ष 2018–19 से अब तक किसानों को 1.58 लाख फसली अवशेष प्रबंधन मशीनें दी जा चुकी हैं। इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में मिलाकर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।
सरकार की प्रतिबद्धता
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इस साल सरकार सिर्फ मशीनरी बाँटने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के दिल और दिमाग जीतने पर भी जोर दे रही है। यह एक “जन आंदोलन” है, जो गाँवों, स्कूलों और घरों तक पहुँचेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी और लोगों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में यह अभियान वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार किसानों की भागीदारी और मशीनों के इस्तेमाल से पराली जलाने की घटनाएँ काफी कम होंगी।
यह अभियान न सिर्फ पंजाब बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है। अगर किसान और जनता मिलकर पराली जलाने से बचें, तो प्रदूषण पर बड़ी हद तक काबू पाया जा सकता है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।
