पंजाब सरकार ने शिक्षा विभाग में एक बड़ा कदम उठाते हुए उन शिक्षकों के खिलाफ सख्ती दिखाई है जो अस्थायी (आर्ज़ी) ड्यूटी के तहत लंबे समय से अपने मनपसंद स्टेशनों पर तैनात थे। सरकार ने ऐसी करीब 1000 अस्थायी ड्यूटियों को खत्म करने का फैसला लिया है। अब दिसंबर 2025 तक सभी ऐसे शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापन (original posting) वाले स्कूलों में वापस भेजा जाएगा।
राजनीतिक सिफारिशों पर की गई थीं तैनातियां
जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में शिक्षक राजनीतिक सिफारिशों या प्रशासनिक दबाव के कारण अपनी पसंद की जगहों पर तैनात कर दिए गए थे। इनमें से कई शिक्षकों की पहुंच विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों तक बताई जाती है। अब सरकार के नए आदेश के बाद, इन शिक्षकों को अपने मनपसंद स्टेशन छोड़ने होंगे और मूल कार्यस्थल पर लौटना पड़ेगा।
शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस का सख्त रुख
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने स्पष्ट कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर शिक्षा विभाग में अस्थायी ड्यूटियों पर कड़ी पाबंदी लगाई गई है। मंत्री ने कहा कि वर्षों से विभाग में ऐसी तैनातियों को लेकर मनमानी होती रही है, लेकिन अब यह प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। उनका कहना है कि इससे विभाग में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित होगी।
ग्रामीण इलाकों में शिक्षक संकट का असर
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अस्थायी ड्यूटी प्रणाली के कारण राज्य के ग्रामीण, पिछड़े और सीमावर्ती इलाकों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई थी। इन इलाकों के स्कूलों में पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ रहा था, जबकि शहरी या सुविधाजनक स्थानों पर शिक्षक अधिक संख्या में मौजूद थे। इस असमानता को खत्म करने के लिए सरकार ने अब संतुलित तैनाती नीति लागू करने का फैसला किया है।
दिसंबर तक सभी को वापस भेजा जाएगा
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस फैसले की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दिसंबर तक सभी शिक्षकों को उनकी मूल तैनाती वाली जगहों पर भेजने की योजना बनाई गई है। विभागीय आदेश के मुताबिक, आगे किसी भी शिक्षक को राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के तहत अस्थायी ड्यूटी देने की अनुमति नहीं होगी।
