पंजाब में सड़क हादसों को कम करने और दुर्घटना के बाद लोगों तक तेजी से मदद पहुंचाने के लिए सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। पंजाब पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और जियोस्पेशियल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने जा रही है। इस योजना का लक्ष्य पंजाब को देश में सड़क सुरक्षा के एक बड़े हब के रूप में विकसित करना है।
दो साल में हजारों लोगों की मदद
फरवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच फोर्स ने 43,983 सड़क हादसों में पहुंचकर 47,386 लोगों की मदद की। इनमें 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। SSF को खासतौर पर हाईवे और प्रमुख सड़कों पर तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है।
6 से 10 मिनट में मदद पहुंचाने पर जोर
SSF के पास 144 हाईटेक वाहन और 1,600 से ज्यादा प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। करीब 4,100 किलोमीटर हाईवे और प्रमुख सड़कों पर इनकी रणनीतिक तैनाती की गई है। हादसे की सूचना मिलने के बाद टीमों का लक्ष्य करीब 6 से 10 मिनट में कार्रवाई करना है। ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ मॉडल के तहत हादसे के कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंचकर एंबुलेंस आने से पहले जरूरी प्राथमिक सहायता देने पर जोर है।
हादसों में मौतों में आई कमी
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार SSF की निगरानी वाले मार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 45 से 48 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक इन मार्गों पर 2023 में 1,955 मौतें हुई थीं, जो 2024 में घटकर 1,016 रह गईं।
AI और ड्रोन बताएंगे खतरे का संकेत
अब SSF के दूसरे चरण में निगरानी का दायरा बढ़ाने की योजना है। ‘Vision SSF-2047’ के तहत AI, ड्रोन, सैटेलाइट डेटा और जियोस्पेशियल तकनीक को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सड़क पर किसी घटना की रियल टाइम जानकारी हासिल करने, संभावित दुर्घटना वाले स्थानों की पहचान करने और ट्रैफिक जाम का पहले से अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से होगी निगरानी
इस योजना में Intelligent Transport Management System (ITMS) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। AI, IoT सेंसर और रियल टाइम डेटा के जरिए ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश होगी। वहीं ANPR तकनीक से वाहनों की निगरानी और डेटा आधारित विश्लेषण को मजबूत किया जाएगा।
