आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है। पहले ही दिन दोनों सदनों में जहां कई अहम मुद्दों पर बहस हुई, वहीं राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने देश में विमानों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर सवाल उठाया। हाल ही में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हवाई यात्रा तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इस क्षेत्र की निगरानी करने वाला संगठन DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) कमजोर होता जा रहा है।
DGCA में स्टाफ की भारी कमी
राघव चड्ढा ने संसद में बताया कि DGCA इस समय भारी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। तकनीकी स्टाफ की लगभग 55% पोस्टें खाली हैं। इनमें एयर सेफ्टी जांच, पायलट लाइसेंसिंग, विमान के रख-रखाव की निगरानी, और मौसम की दिशा व गति का रिकॉर्ड रखने जैसे अहम काम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जब देश में हवाई यात्रा का दायरा इतना तेज़ी से बढ़ रहा है, तो ऐसे समय में DGCA की ये स्थिति चिंता का विषय है। स्टाफ की इतनी बड़ी कमी कोई छोटी बात नहीं, बल्कि इसे एक “संस्थागत मंदी” माना जाना चाहिए।
फंडिंग और स्वतंत्रता की मांग
राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि DGCA को ज़रूरत के हिसाब से बजट और संसाधन नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे देश में SEBI (शेयर बाज़ार की निगरानी एजेंसी) और TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी) जैसे स्वतंत्र संस्थान बनाए गए हैं, वैसे ही DGCA को भी एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था बनाया जाए, ताकि वह दबाव मुक्त होकर काम कर सके।
“सुरक्षा के साथ समझौता नहीं”
अपने संबोधन में उन्होंने दोहराया कि हवाई सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि हम यात्रियों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो DGCA को मज़बूत बनाना ही होगा।
उनका यह मुद्दा न केवल सरकार के लिए विचारणीय है, बल्कि देश की हवाई यात्रा से जुड़े हर नागरिक के लिए अहम है।
