बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ निकाली गई कांग्रेस और आरजेडी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का पहला चरण पटना में सोमवार को खत्म हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने 16 दिनों तक 23 जिलों में 1300 किलोमीटर की यात्रा कर बीजेपी के खिलाफ ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की। यात्रा के दौरान हर जिले में बड़ी भीड़ उमड़ी और कार्यकर्ताओं में खासा जोश दिखाई दिया।
दो दशक बाद सत्ता वापसी का सपना
बिहार की राजनीति में कांग्रेस पिछले 35 साल से सत्ता से बाहर है और आरजेडी भी करीब 20 साल से अकेले सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। ऐसे में यह यात्रा विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल बनाने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है। राहुल और तेजस्वी की जोड़ी ने जनता से सीधे जुड़ने का दांव खेला है। सवाल यही है कि क्या यह जोश वोटों में बदल पाएगा और विपक्ष सत्ता तक पहुंच पाएगा?
राहुल का ‘एटम बम’ से ‘हाइड्रोजन बम’ वाला बयान
पटना रैली में राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि बीजेपी पर अब तक ‘वोट चोरी’ का एटम बम फोड़ा गया था, लेकिन जल्द ही ‘हाइड्रोजन बम’ फूटेगा। उनका इशारा था कि आने वाले दिनों में वे इससे भी बड़ा खुलासा करेंगे। राहुल के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में कांग्रेस और आरजेडी इस मुद्दे को और ज्यादा हवा देंगे।
जनता के बीच उतरने का देसी अंदाज
इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी का अंदाज पूरी तरह से देसी राजनीति वाला रहा। उन्होंने गांवों में रात बिताई, दलित बस्तियों में चाय पी, युवाओं के साथ मोटरसाइकिल पर सवार हुए और आम लोगों से सीधे संवाद किया। एक दिन उनकी बाइक पर प्रियंका गांधी भी बैठीं, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। प्रियंका थोड़े समय के लिए ही जुड़ीं, लेकिन उनके आने से मिथिलांचल के इलाकों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा।
सिर्फ ‘वोट चोरी’ नहीं, सामाजिक न्याय का एजेंडा भी
यात्रा में राहुल-तेजस्वी ने मुद्दों को सिर्फ वोट चोरी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने जाति जनगणना और आरक्षण पर भी जोर दिया। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार ने दबाव में आकर जाति जनगणना का ऐलान किया है, लेकिन यह अधूरी होगी। उन्होंने यह भी वादा किया कि अगर इंडिया ब्लॉक की सरकार बनी तो 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा हटा दी जाएगी। इससे साफ है कि राहुल-तेजस्वी ने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग को साधने की बड़ी रणनीति बनाई है।
क्या बनेगा माहौल या सिर्फ उत्साह?
‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने बिहार की राजनीति में हलचल जरूर मचा दी है। राहुल गांधी ने जनता के बीच जाकर कांग्रेस में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की है, वहीं तेजस्वी यादव ने खुद को विपक्ष का असली चेहरा साबित करने का प्रयास किया है। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या यह यात्रा सिर्फ भीड़ और उत्साह तक सीमित रह जाएगी या फिर सच में बिहार की सत्ता की कुंजी विपक्ष के हाथों तक पहुंचा पाएगी।
