आज सुबह पंजाब विधानसभा परिसर में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। जिस समय विधानसभा का विशेष सत्र शुरू होने वाला था, ठीक उसी समय आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ अपने समर्थकों के साथ परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते नजर आए। अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां अफरा-तफरी मच गई।
क्यों हुआ प्रदर्शन?
पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ, जिन्हें हाल ही में पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया था, अब खुलकर पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। आज उन्होंने AAP के रोपड़ से विधायक दिनेश चड्ढा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
करीब एक दर्जन युवक, जिनमें से अधिकतर संदोआ समर्थक बताए जा रहे हैं, दिनेश चड्ढा मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए विधानसभा के बाहर पहुंच गए।
सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हालात संभाले और प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर से बाहर निकाला।
क्या कहा संदोआ ने?
मीडिया से बातचीत में अमरजीत संदोआ ने पार्टी और विधायक दिनेश चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
“दिनेश चड्ढा अपने इलाके के लोगों से तानाशाही व्यवहार करते हैं। लोगों की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं हैं, और पार्टी नेतृत्व आंख मूंदे बैठा है। अब AAP आम आदमी की नहीं, ‘एक आदमी’ की पार्टी बन गई है।”
संदोआ ने यह भी कहा कि पार्टी में सच्चाई बोलना अब ‘गुनाह’ माना जा रहा है और जो सवाल उठाता है, उसे चुप करा दिया जाता है।
विधानसभा परिसर में मचा हड़कंप
इस पूरे घटनाक्रम से विधानसभा की सुरक्षा में लगे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। हंगामा होते ही अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और सभी प्रदर्शनकारियों को बाहर किया गया।
हालांकि, किसी भी तरह की हिंसा या गंभीर झड़प की जानकारी नहीं है। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा लेकिन इसने AAP के अंदर चल रहे अंतर्कलह को सबके सामने ला दिया।
सरकारी प्रतिक्रिया क्या रही?
विधानसभा सचिवालय की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो विधानसभा सत्र को देखते हुए सुरक्षा और कड़ी की जा सकती है ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो।
राजनीति में बगावत की दस्तक?
अमरजीत संदोआ का यह कदम सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि AAP में उभर रहे असंतोष की एक झलक माना जा रहा है। विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले किया गया यह प्रदर्शन दिखाता है कि पार्टी के भीतर बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा।
अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस बगावत को कैसे संभालता है और क्या संदोआ जैसे नेताओं को मनाया जाएगा या पार्टी से और दूरी बन जाएगी।
अमरजीत संदोआ का ये विरोध सिर्फ शुरुआत है या कुछ बड़ा तूफान आने वाला है—यह आने वाला वक्त बताएगा।
