अमेरिका से गुरुवार को भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। तमाम रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मास्युटिकल उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाने की अपनी योजना से जेनेरिक दवाओं को बाहर रखने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार में फार्मा कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
भारत के लिए क्यों अहम है ट्रंप का यह फैसला
यह फैसला भारत के लिए इसलिए बेहद अहम है क्योंकि अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारत से होने वाले जेनेरिक दवाओं के कुल निर्यात में से करीब 40% से अधिक हिस्सा अकेले अमेरिका को जाता है। अमेरिका में भारतीय दवाओं की भारी मांग है, क्योंकि ये दवाएं न केवल किफायती हैं बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती हैं।
अमेरिका और चीन दोनों ही देशों पर जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति के लिए निर्भर है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर चीन पर निर्भरता घटाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में भारत के लिए यह मौका दोहरा लाभ लेकर आया है — एक तरफ टैरिफ से राहत और दूसरी ओर अमेरिकी बाजार में भरोसे की बढ़ती जगह।
फार्मा शेयरों में दिखा जबरदस्त उछाल
अमेरिका से आई इस राहत भरी खबर का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिला। फार्मा सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयर तेजी के साथ ग्रीन जोन में पहुंच गए।
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सन फार्मा का शेयर उछलकर ₹1,637 पर पहुंच गया।
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सिप्ला के शेयर में 1.10% की बढ़त दर्ज हुई और यह ₹1,511 पर ट्रेड करता दिखा।
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ल्यूपिन का शेयर 3.59% की तेजी के साथ ₹1,974 तक पहुंच गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, अगर अमेरिकी प्रशासन जेनेरिक दवाओं को लेकर अपनी नीति में स्थिरता बनाए रखता है, तो आने वाले महीनों में भारत की फार्मा कंपनियों के मुनाफे में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
अमेरिकी नीति में बदलाव से भारत को बड़ा फायदा
ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती दे सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय दवाओं की पकड़ और मजबूत होगी और भारत की फार्मा इंडस्ट्री को निर्यात में बड़ा बढ़ावा मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले वर्षों में भारत की दवा निर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाएगा।
संक्षेप में कहा जाए तो, ट्रंप के इस फैसले से भारत को न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी राहत मिली है। अब देखना होगा कि अमेरिका में आगामी महीनों में इस नीति का क्या असर देखने को मिलता है।
