बुधवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया भारी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया। बाजार खुलते ही रुपया लगभग 92.05 प्रति डॉलर के स्तर पर ट्रेड करने लगा, जो पिछले बंद स्तर से काफी कमजोर था। कुछ समय बाद यह और गिरकर करीब 92.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
मंगलवार को रुपया 91.49 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन बुधवार को इसमें तेज गिरावट देखने को मिली।
वेस्ट एशिया में तनाव का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी के पीछे मुख्य वजह वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ गई है।
ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में डॉलर की ओर रुख करते हैं। डॉलर की मांग बढ़ने से उसकी कीमत मजबूत होती है और दूसरी मुद्राओं पर दबाव पड़ता है। यही वजह है कि रुपये की कीमत में गिरावट देखने को मिल रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
रुपये पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी है। पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम करीब 13 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। जब तेल महंगा होता है तो भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर हो सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
घरेलू शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के पैसे निकलने का असर भी रुपये पर दिखाई दे रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में बिकवाली की है।
एक कारोबारी दिन में ही विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
इस साल भी कमजोर रहा रुपया
अगर पूरे साल के प्रदर्शन को देखें तो रुपया पहले से ही दबाव में रहा है। इस साल डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
पिछले वर्ष भी रुपया करीब 5 प्रतिशत कमजोर हुआ था। लगातार गिरावट के कारण इसे उभरते बाजारों की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में गिना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है असर
रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे पेट्रोल, डीजल और कई अन्य चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को इसका कुछ फायदा भी मिल सकता है, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में ज्यादा पैसा मिलता है।
फिलहाल बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों के आधार पर रुपये की दिशा तय हो सकती है।
