पंजाब ने अपनी स्कूल शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पढ़ाई का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी पहल के तहत पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) ने एक राष्ट्रीय स्तर की एआई कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें देशभर के शिक्षा विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के लोग शामिल हुए।
शिक्षा मंत्री ने बताया बड़ा बदलाव
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस पहल को शिक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि एआई को शिक्षा में शामिल करने से छात्रों को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार किया जा सकेगा। उनके अनुसार यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नए प्रयोग करने और सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद करेगा।
एआई अब सिलेबस का हिस्सा बनेगा
पीएसईबी के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने घोषणा की कि अब एआई को स्कूल के सिलेबस में शामिल किया जाएगा। यह मौजूदा कंप्यूटर साइंस विषय का हिस्सा होगा, लेकिन इसकी अहमियत और बढ़ा दी जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि कंप्यूटर साइंस और एआई से जुड़े सीखने के परिणाम छात्रों के बोर्ड सर्टिफिकेट में भी दर्ज किए जाएंगे, जिससे इस विषय की वैल्यू और बढ़ेगी।
जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने पर जोर
इस पहल का मकसद सिर्फ तकनीक सिखाना नहीं है, बल्कि छात्रों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना भी है। बोर्ड का मानना है कि एआई का असर भविष्य में हर क्षेत्र पर पड़ेगा, इसलिए जरूरी है कि छात्र इसे सही और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना सीखें।
इस दौरान एआई के नैतिक उपयोग और जिम्मेदारी पर भी खास जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव
कॉन्फ्रेंस में कई बड़े शिक्षा विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। हरियाणा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. पवन कुमार ने कहा कि एआई को सिर्फ कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि सभी विषयों में शामिल किया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर बोर्ड के चेयरमैन गुलाम हसन शेख ने कहा कि एआई को अपनाते समय जिम्मेदारी और संतुलन जरूरी है, ताकि इससे किसी तरह की असमानता न बढ़े।
इंडस्ट्री और शिक्षा के सहयोग पर जोर
इंटेल की सीनियर डायरेक्टर श्वेता खुराना ने कहा कि शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग बहुत जरूरी है। इससे छात्रों को वास्तविक दुनिया की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा सकता है।
सीबीएसई के अधिकारी डॉ. बिस्वजीत साहा ने राज्यों के बीच तकनीकी अंतर को खत्म करने की बात कही और इसे भविष्य के लिए जरूरी बताया।
गूगल और स्टार्टअप्स की भागीदारी
गूगल के प्रतिनिधि हेमंत भल्ला ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि एआई को जिम्मेदारी के साथ लागू करना बेहद जरूरी है।
कॉन्फ्रेंस में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें एआई आधारित स्टार्टअप प्रोजेक्ट्स और मॉडल दिखाए गए। इससे यह समझने में मदद मिली कि आने वाला शिक्षा सिस्टम कैसा होगा।
पैनल चर्चा में भविष्य की शिक्षा पर फोकस
कॉन्फ्रेंस में तीन खास पैनल चर्चाएं हुईं। इनमें एआई को शिक्षा में लागू करने, रोबोटिक्स और स्किल डेवलपमेंट, और इंडस्ट्री 4.0 के लिए छात्रों को तैयार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने माना कि आने वाले समय में एआई और ऑटोमेशन का असर रोजगार पर पड़ेगा, इसलिए छात्रों को नई स्किल्स सिखाना जरूरी है।
नवाचार और सहयोग की दिशा में कदम
कार्यक्रम के अंत में पीएसईबी के सचिव केशव गोयल ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पहल पंजाब में शिक्षा को नए स्तर पर ले जाने का काम करेगी।
