सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 719 अंक टूटकर 73,524 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 23,123 के आसपास बंद हुआ। बाजार में आई इस कमजोरी के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और पूरे दिन बिकवाली का माहौल बना रहा।
मध्य पूर्व तनाव का असर
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है। निवेशकों को चिंता है कि यदि यह तनाव आगे बढ़ता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत
भारतीय बाजार पर एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों की कमजोरी का भी असर देखने को मिला। दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भी बाजार में बिकवाली जारी रखी। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है। इसके चलते कई बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
बैंकिंग और आईटी शेयरों पर दबाव
आज की गिरावट में बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। कई बड़े निजी और सरकारी बैंकों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। इसके अलावा आईटी कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। इन दोनों सेक्टरों का बाजार सूचकांकों में बड़ा योगदान होता है, इसलिए इनमें आई गिरावट का असर पूरे बाजार पर पड़ा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी फिसले
केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। कई छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे खुदरा निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
