घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 फीसदी टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 126.65 अंक की गिरावट के साथ 23,869.60 पर आ गया। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर
गुरुवार के कारोबार में पीएसयू बैंक, मेटल, फार्मा, एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। हालांकि ऑटो और मीडिया सेक्टर के कुछ शेयरों ने बढ़त दर्ज कर बाजार को सीमित सहारा दिया। सेंसेक्स के कई प्रमुख शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि बाजार में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से काफी अधिक रही।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट
बाजार में आई इस गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) एक ही दिन में करीब 3 लाख करोड़ रुपये घट गया। लगातार चौथे दिन की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले कारोबारी सत्रों पर सभी की नजरें टिकी हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों को सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
