साल 2025 के आख़िरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाज़ार में कमजोरी देखने को मिली। सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स करीब 346 अंक टूटकर 84,695 के आसपास बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी गिरावट में रहा और 25,950 के नीचे फिसलकर कारोबार समाप्त किया।
निवेशकों में सतर्कता, मुनाफावसूली हावी
बाज़ार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की सतर्कता रही। साल के अंत में कई निवेशकों ने मुनाफा वसूली को तरजीह दी, जिससे दबाव बना। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक बाज़ारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाज़ार की धारणा को प्रभावित किया।
किन शेयरों में दिखी सबसे ज़्यादा कमजोरी
आज के कारोबार में आईटी, पोर्ट्स और चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। खासतौर पर कुछ बड़े आईटी शेयरों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्टॉक्स में गिरावट ने सेंसेक्स पर दबाव बढ़ाया। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। इन दोनों सूचकांकों ने सेंसेक्स और निफ्टी से भी कमजोर प्रदर्शन किया। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल रहा।
वैश्विक संकेतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी सुस्ती का माहौल रहा, जिसका असर भारतीय शेयर बाज़ार पर पड़ा। अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों में सीमित कारोबार और आने वाले आर्थिक आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।
आगे का रास्ता: निवेशकों की नज़र नए साल पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ज़्यादातर साल के अंत की मुनाफावसूली और कम ट्रेडिंग वॉल्यूम की वजह से है। नए साल में आर्थिक आंकड़े, महंगाई से जुड़े संकेत और वैश्विक नीतिगत फैसले बाज़ार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाज़ी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान दें।
