7 मई, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कल की शानदार तेजी के बाद आज बाजार की शुरुआत तो बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली (profit booking) के चलते बाजार अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 114.00 अंक (0.15%) की मामूली गिरावट के साथ 77,844.52 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी हल्की सुस्ती के साथ लाल निशान में बंद हुआ।
तेजी के साथ हुई थी शुरुआत, पर टिक नहीं पाए ‘बुल्स’
आज सुबह ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के दम पर सेंसेक्स करीब 380 अंक उछलकर 78,339.24 पर खुला था। शुरुआती कारोबार में ऐसा लग रहा था कि बाजार आज 78,500 के पार निकल जाएगा। लेकिन दोपहर होते-होते निवेशकों ने ऊंचे भावों पर बिकवाली शुरू कर दी। विशेष रूप से दिग्गज आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी और अंत में यह मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।
इन वजहों ने बदला बाजार का मूड
बाजार में आज की सुस्ती के पीछे कुछ प्रमुख कारण रहे:
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मुनाफावसूली: कल की 940 अंकों की बड़ी रैली के बाद ट्रेडर्स ने आज मुनाफा घर ले जाना बेहतर समझा।
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मिक्स्ड ग्लोबल सिग्नल: एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों में थोड़ी सावधानी देखी गई।
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महंगाई की चिंता: हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कल गिरावट आई थी, लेकिन आज इसमें स्थिरता रहने से निवेशकों को महंगाई के आंकड़ों का इंतजार है।
इन शेयरों में रही हलचल
आज के कारोबार में कुछ चुनिंदा शेयरों में अच्छा एक्शन देखने को मिला:
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टॉप गेनर्स: बाजार की गिरावट के बावजूद भारत डायनेमिक्स और मैक्स फाइनेंशियल जैसे शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों ने भी बाजार को संभालने की कोशिश की।
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टॉप लूजर्स: रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी (L&T) और कुछ प्रमुख बैंकिंग शेयरों में आज दबाव देखा गया। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों ने भी सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया।
छोटे और मझोले शेयरों का हाल
बड़े इंडेक्स में गिरावट के बावजूद, आज ‘ब्रॉडर मार्केट’ यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में रौनक बनी रही। रिटेल निवेशकों ने छोटी कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी दिखाई, जिससे कई मिडकैप शेयरों ने आज भी बढ़त दर्ज की। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित थी और निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कम नहीं हुआ है।
