अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में सोमवार देर रात आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। सबसे ज़्यादा असर कुनार और नंगरहार प्रांतों में देखा गया, जहाँ घर, इमारतें और सड़कें मलबे में बदल गईं। अब तक 812 लोगों की मौत और करीब 3,000 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस आपदा से 12,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांव पूरी तरह उजड़ गए हैं।
रात भर झटके, गांव तबाह
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह घटना किसी प्रलय से कम नहीं थी। कुनार के पत्रकार मतीउल्लाह शहाब ने बताया कि रातभर 17 झटके महसूस हुए। अंदरलचक गांव में अकेले 79 लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, “मैंने जो गांव देखे, वे पूरी तरह मिट्टी में मिल गए।”
पीड़ितों की दर्दनाक कहानियाँ
भूकंप में ज़िंदगी खो चुके परिवारों की कहानियाँ दिल दहला देने वाली हैं। पिरान गांव के हमीद जन ने बताया, “मेरा घर पूरी तरह ढह गया। मैं पाँच घंटे मलबे में दबा रहा, गांव वालों ने मुझे निकाला। लेकिन मेरी पत्नी और दो बेटे ज़िंदा नहीं बचे। ऐसा लगा जैसे पूरा पहाड़ गिर पड़ा हो।”
नंगरहार के एक निवासी एज्जतुल्लाह साफी ने कहा, “मैं रात में बच्चों और महिलाओं की चीखों से जागा। हर तरफ मलबा और चीखें सुनाई दे रही थीं। ऐसा लगा जैसे छोटी सी क़यामत आ गई हो।”
बचाव कार्यों में मुश्किलें
भूकंप से सड़कों पर भूस्खलन हो गया, जिससे कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। बिजली ठप होने और संचार व्यवस्था टूटने से राहत कार्य और भी कठिन हो गए हैं। हेलिकॉप्टरों से कुछ घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है, लेकिन अभी भी दर्जनों गांवों में कोई मदद नहीं पहुँची है।
कुनार की मजार घाटी में हालात इतने खराब हैं कि लोग पहले से ही कब्रें खोद रहे हैं, क्योंकि मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, “महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे हैं, लेकिन कोई सरकारी मदद अभी तक नहीं पहुँची।”
तालिबान सरकार की गुहार
तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि 800 से अधिक लोगों की मौत और करीब 2,800 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने दुनिया से मदद की अपील की है। हालांकि, कई स्थानीय लोग सरकार की धीमी कार्रवाई पर नाराज़गी जता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मदद का सहारा
संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए 50 लाख डॉलर की आपातकालीन सहायता देने की घोषणा की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि ज़रूरतों का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत मदद पहुँचाई जा रही है।
भारत ने भी अफगानिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत ने 1,000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है। उन्होंने एक्स (Twitter) पर लिखा, “भारत इस मुश्किल घड़ी में अफगानिस्तान के साथ है।”
अफगानिस्तान का यह भूकंप देश के लिए एक और बड़ी त्रासदी बन गया है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और राहत कार्य अभी भी जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित क्षेत्रों में आने वाले दिनों में महामारी और खाद्य संकट जैसी नई चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं।
