लद्दाख इन दिनों तनाव और हलचल के दौर से गुजर रहा है। अलग राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर यहां आंदोलन तेज़ हो गया है। इसी बीच 24 सितंबर को लेह में भारी हिंसा हुई, जिसके बाद हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने सख्त कदम उठाए और जाने-माने पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। वांगचुक को वर्तमान में जोधपुर जेल में रखा गया है।
लेह में कर्फ्यू और तनाव
हिंसा के बाद लेह में तीसरे दिन भी कर्फ्यू जारी है। प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सीआरपीएफ की तैनाती कर दी है। इंटरनेट की स्पीड धीमी कर दी गई है ताकि अफवाहें फैलने से रोकी जा सकें। हालांकि, फिलहाल माहौल शांत है, लेकिन लोगों के बीच तनाव बना हुआ है।
हिंसा में सुरक्षाकर्मी घायल
24 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने लेह में बीजेपी कार्यालय और सरकारी भवनों को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस वाहनों को भी जला दिया गया और सुरक्षा बलों पर पथराव हुआ। इस घटना में 40 पुलिस और सीआरपीएफ जवान घायल हुए हैं। प्रशासन ने हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनके बयानों ने युवाओं को भड़काया।
दिल्ली में होगा वार्ता का नया दौर
स्थिति को संभालने और समाधान खोजने के लिए अब बातचीत का रास्ता चुना गया है। 29 सितंबर को लद्दाख एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेगा। यह बैठक दोपहर 12 बजे होगी। प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य जम्मू से आएंगे, जबकि ज्यादातर सदस्य लेह से स्पाइसजेट की फ्लाइट पकड़कर दिल्ली पहुंचेंगे। सभी सदस्य सुबह 11 बजे चाणक्यपुरी स्थित लद्दाख भवन में इकट्ठा होंगे और वहां से बैठक के लिए रवाना होंगे।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार का कहना है कि लद्दाख के लोगों की मांगों और उम्मीदों को गंभीरता से सुना जा रहा है। सरकार का यह भी दावा है कि संवैधानिक सुरक्षा देने की दिशा में कई अहम कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण को 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 84 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही, परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। सरकार का मानना है कि अब तक जो भी बड़े फैसले हुए हैं, वे बातचीत के जरिए ही संभव हुए हैं, और आगे भी समाधान का यही रास्ता निकलेगा।
लोगों की उम्मीदें
लद्दाख के लोग लंबे समय से अपनी पहचान और संस्कृति की सुरक्षा को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा मिले और अलग राज्य का दर्जा दिया जाए। सोनम वांगचुक जैसे नेता इन मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं, जिसकी वजह से वे आम जनता में काफी लोकप्रिय हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं।
