राजधानी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज एक बार फिर पूरी मजबूती और तर्क के साथ राज्य के जल अधिकारों की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब के पास अब किसी भी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं बचा है। भूजल संकट, सूखती नदियां और बढ़ती जरूरतों के बीच, पंजाब का हक़ अब सिर्फ मांग नहीं, एक जरूरी सच है।
पानी की लड़ाई: SYL नहीं, अब YSL की ज़रूरत
मुख्यमंत्री ने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के बजाय यमुना-सतलुज लिंक (YSL) का विकल्प पेश किया। उनका कहना है कि जब सतलुज खुद सूख चुकी है, तो उसमें से पानी देना तो दूर, बचा ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा और यमुना का पानी सतलुज के ज़रिए पंजाब तक लाया जाना चाहिए ताकि राज्य की सिंचाई और पीने के पानी की ज़रूरतें पूरी हो सकें।
भूजल संकट की भयावह तस्वीर
पंजाब में ट्यूबवेलों की संख्या 1980 में जहां 6 लाख थी, वहीं 2018 में यह 14.76 लाख तक पहुंच गई। यह 200% से अधिक की वृद्धि है। राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉक (75%) अत्यधिक दोहन वाले घोषित किए जा चुके हैं। इसके उलट हरियाणा में यह आंकड़ा 61% है। पंजाब का भूजल दोहन राष्ट्रीय औसत से 157% अधिक है — यह भारत के लिए चेतावनी है।
पंजाब को मिले उसका ‘जल हक़’
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम और चिनाब — से भारत को अधिक पानी लेने की अनुमति मिली है, तो इन स्रोतों का पानी पंजाब को प्राथमिकता पर दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि भाखड़ा और पौंग जैसे बांधों के ऊपर नए जलाशय बनाए जाएं, ताकि पश्चिमी नदियों के पानी को सुरक्षित और नियंत्रित किया जा सके।
पंजाब का योगदान, लेकिन हक़ नहीं
भगवंत मान ने बताया कि पंजाब ने 2024 में भारत के अन्न भंडार में 124.26 लाख मीट्रिक टन अनाज दिया — जो देश का 47% है। इसके बावजूद, राज्य को केवल 40% नदी जल मिला, जबकि 60% पानी उन राज्यों को मिला जिनसे नदियां गुजरती भी नहीं हैं।
न्यायसंगत पुनर्विचार की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल समझौते और ट्रिब्यूनल फैसले अब पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार पुनः मूल्यांकन के योग्य हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब को यमुना जल वितरण में भी भागीदार माना जाए, क्योंकि यह भारत सरकार के सिंचाई आयोग की रिपोर्ट में रिपेरियन राज्य है।
SYL नहीं, YSL ही समाधान
भगवंत मान का प्रस्ताव साफ है: SYL नहर को त्यागकर YSL प्रोजेक्ट पर काम किया जाए, जिससे शारदा, यमुना और सतलुज का पानी समान रूप से बंटे। इससे हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की ज़रूरतें भी पूरी होंगी और पंजाब को उसका हक़ भी मिलेगा।
भावनात्मक मुद्दा, राष्ट्रीय असर
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि SYL नहर अब सिर्फ कानूनी नहीं, भावनात्मक और राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। पंजाब की कानून व्यवस्था और शांति पर असर पड़ सकता है। इसलिए, पंजाब के साथ न्याय करना ही राष्ट्रीय हित में है।
पंजाब पानी मांग नहीं रहा, बल्कि अपने अधिकार की बात कर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की यह पहल न सिर्फ तर्कसंगत है, बल्कि पंजाब के अस्तित्व, किसान और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है।
