पंजाब की पवित्र और ऐतिहासिक नगरी श्री आनंदपुर साहिब की सुंदरता और पवित्रता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए आज एक अनोखी पहल की शुरुआत हुई।
‘व्हाइट सिटी प्रोजेक्ट’ के नाम से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य है — पूरे शहर को सफेद रंग में रंगकर उसे शांति, स्वच्छता और आध्यात्मिकता का प्रतीक बनाना।
यह प्रोजेक्ट श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी जयंती को समर्पित है।
अरदास के साथ हुआ शुभारंभ
इस शुभ अवसर पर किला आनंदगढ़ साहिब कार सेवा के बाबा सतनाम सिंह जी ने अरदास की।
इसके बाद पंजाब के शिक्षा मंत्री और श्री आनंदपुर साहिब के विधायक स. हरजोत सिंह बैंस ने स्थानीय बस स्टैंड से प्रोजेक्ट की शुरुआत की।
उन्होंने स्वयं ब्रश चलाकर पूरे शहर को सफेद रंग में रंगने के इस ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ किया।
विरासत और सौंदर्य का संगम
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा,
“आज हम आनंदपुर साहिब को सुंदरता, श्रद्धा और शांति का प्रतीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। यह पहल सिर्फ रंग भरने का नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक विरासत को संजोने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का प्रयास है।”
उन्होंने बताया कि शहर की गलियों की सफाई, सड़कों का नवीनीकरण और भवनों को सफेद रंग में रंगने का काम तेज़ी से जारी रहेगा।
सामुदायिक सहयोग और जनभागीदारी
मंत्री बैंस ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
स्थानीय समाजसेवियों और श्रद्धालुओं ने 20,000 लीटर से अधिक सफेद पेंट का योगदान दिया है।
उन्होंने कहा, “यह अभियान सामुदायिक भावना और एकता का जीवंत उदाहरण है। हम सभी की भागीदारी से यह सेवा और भी सफल बनेगी।”
युवाओं और पंचायतों से अपील
हरजोत सिंह बैंस ने युवाओं, पंचायतों और स्थानीय निवासियों से इस सेवा में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा कि अगले 5 से 7 दिनों में पूरे शहर की हर गली और मोहल्ला सफेद रंग में चमक उठेगा, जिससे श्री आनंदपुर साहिब एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को जीवंत करेगा।
गुरु साहिब की शिक्षाओं को समर्पित
बैंस ने कहा,
“जहाँ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने एक आध्यात्मिक दुर्ग की नींव रखी थी, वहीं से आज हम उनकी शिक्षाओं और विरासत को नई रोशनी में आगे बढ़ाने की शुरुआत कर रहे हैं।”
उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन इस प्रोजेक्ट को पूरा सहयोग देगा ताकि गुरु साहिब जी की 350वीं शहीदी जयंती के मौके पर यह नगरी श्रद्धा, सौंदर्य और एकता का प्रतीक बन सके।
