शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। दिनभर के कारोबार के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,470 अंक गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 488 अंक टूटकर 23,151.10 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है और बाजार में नकारात्मक माहौल देखने को मिला।
दिनभर दबाव में रहा बाजार
शुक्रवार सुबह बाजार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखी गई। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बैंकिंग, मेटल, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के कई बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार और कमजोर हो गया।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आई गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गई है। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है और कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हो जाती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी रही। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया और सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
15 महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह शेयर बाजार में आई गिरावट पिछले करीब 15 महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट में से एक रही है। लगातार तीसरे दिन बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भी भारी कमी आई।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार में फिर से स्थिरता देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
