सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिया। कारोबार के दौरान कई बार रिकवरी की कोशिश हुई, लेकिन अंत तक बिकवाली हावी रही। दिन समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 372 अंकों की गिरावट के साथ 76,728.37 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी करीब 110 अंक टूटकर 23,946.25 के स्तर पर आ गया। पिछले दो कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद यह गिरावट निवेशकों के लिए सावधानी का संकेत मानी जा रही है।
किन कारणों से बढ़ा बाजार पर दबाव?
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कमजोर मानसून को लेकर चिंताएं और चुनिंदा बड़ी कंपनियों में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना। निवेशक फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनाए हुए हैं। इसी वजह से दिनभर बाजार में अस्थिरता देखने को मिली और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा कमजोरी
सोमवार के कारोबार में ऑटो और बैंकिंग शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। ऑटो सेक्टर में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि बैंकिंग, आईटी, मीडिया और ऑयल एंड गैस शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर मेटल, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है और वे नए आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
दिन के अंत में सेंसेक्स 76,728.37 और निफ्टी 23,946.25 पर बंद हुए। बैंक निफ्टी में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन अधिकांश बड़ी कंपनियों में बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार एक संतुलन और स्थिरता की तलाश में है तथा अगले कुछ कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम रह सकते हैं।
