देशभर में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल प्रदर्शन या आंदोलन होने के आधार पर पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा है, तो प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
स्वतंत्र जांच की जरूरत पर दिया जोर
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने छात्र संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं का उल्लेख किया गया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया। इस पर अदालत ने कहा कि पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
याचिकाओं में कई गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई, कई स्थानों पर अत्यधिक बल प्रयोग हुआ और कुछ घटनाओं में हथियारों के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए गए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने, जहां आवश्यक हो वहां एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में किया गया विरोध प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है। अदालत ने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अत्यधिक बल प्रयोग को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत याचिकाओं में उठाए गए आरोपों और जांच की मांग पर विचार करेगी।
