पंजाब सरकार ने उद्योग जगत के लिए बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “राइट टू बिजनेस एक्ट” में बदलाव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि इसका मकसद राज्य में उद्योगों को तेजी से बढ़ावा देना और उन्हें निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
निवेश की सीमा में बड़ा बदलाव
संजय अरोड़ा ने कहा कि पहले इस एक्ट के तहत उद्योगों की अधिकतम सीमा 25 करोड़ रुपए थी। अब इसे बढ़ाकर 125 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा यदि कोई उद्योग इससे अधिक निवेश कर रहा है, तो संबंधित विभाग उसकी आवश्यकतानुसार समीक्षा कर उसे भी शामिल कर सकता है। यह कदम निवेशकों के लिए नए अवसरों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने वाला है।
मंजूरी की प्रक्रिया में आसानी
कैबिनेट ने एक्ट के तहत 5 नई मंजूरियां जोड़ने का निर्णय लिया है। इनमें शामिल हैं:
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लेबर विभाग की मंजूरी
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फैक्ट्री लाइसेंस
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कंसेंट टू इस्टैब्लिश
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कंसेंट टू ऑपरेट (प्रदूषण विभाग)
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वन विभाग की एन.ओ.सी
इस बदलाव से अब उद्योग केवल औद्योगिक पार्क तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पुड्डा और लोकल बॉडीज़ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में भी मान्यता प्राप्त उद्योग इन मंजूरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
मंजूरी का समय तय
अब उद्योगों को फाइल सही होने पर 5 से 18 दिन के भीतर मंजूरी मिलने की गारंटी होगी।
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औद्योगिक पार्कों में पहले से मंजूर उद्योगों को 5 दिन में मंजूरी दी जाएगी।
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अन्य नई जगहों पर नए प्रोजेक्ट (सिर्फ ग्रीन और ऑरेंज श्रेणी के) को 15 दिन में मंजूरी दी जाएगी।
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प्रोजेक्ट विस्तार के लिए अनुमोदन 18 दिन में मिलेगा।
इससे निवेशकों को समय की बचत होगी और उद्योग लगाने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी।
उद्योग जगत के लिए राहत
संजय अरोड़ा ने कहा कि यह फैसला पंजाब को औद्योगिक निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने वाला है। अब नए उद्योग निवेश में देरी नहीं होगी और राज्य में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ पंजाब सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार उद्योगों के लिए सहयोगी और पारदर्शी वातावरण बनाने में अग्रणी है।
