यूरोप के 28 शेंगेन देशों ने विदेशी पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नया एंट्री-एग्जिट सिस्टम (EES) लागू कर दिया है। यह नई प्रणाली 12 अक्टूबर 2025 से सभी सदस्य देशों में लागू हो चुकी है। इस कानून के लागू होने के बाद अब यूरोप आने वाले यात्रियों को पासपोर्ट पर मुहर लगवाने की जरूरत नहीं होगी।
अब ऑनलाइन होगा पूरा इमीग्रेशन प्रोसेस
नई व्यवस्था के तहत जब कोई पर्यटक यूरोप पहुंचेगा, तो इमीग्रेशन एंट्री पॉइंट पर उसका पासपोर्ट स्कैन किया जाएगा और उसके साथ डिजिटल फोटो और फिंगरप्रिंट लिए जाएंगे। इससे यात्रियों की पहचान स्वचालित रूप से दर्ज हो जाएगी। इस प्रक्रिया के चलते अब हवाई अड्डों और बॉर्डर पोस्ट पर लंबी कतारों से छुटकारा मिलेगा, क्योंकि सारी जानकारी ऑनलाइन डेटाबेस में एकीकृत रूप से दर्ज होगी।
हर यात्री का रिकॉर्ड रहेगा यूरोपीय बॉर्डर पुलिस के पास
EES सिस्टम के तहत अब यूरोप में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति की पूरी ट्रैवल हिस्ट्री दर्ज की जाएगी। यानी यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई यात्री किस देश से यूरोप में दाखिल हुआ और किस देश से बाहर निकला। इस डेटा को सभी शेंगेन देशों की बॉर्डर एजेंसियों के बीच साझा किया जाएगा।
गैर-कानूनी प्रवासियों पर सख्ती बढ़ेगी
अधिकारियों के मुताबिक, इस डिजिटल सिस्टम से जहां यात्रियों को सुविधा मिलेगी, वहीं गैर-कानूनी तरीके से आने वाले लोगों पर शिकंजा और कस जाएगा। अब किसी व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं होगा कि वह एक देश से दूसरे देश जाकर राजनीतिक शरण (Asylum) की मांग करे, क्योंकि उसका इमीग्रेशन रिकॉर्ड सभी देशों के पास उपलब्ध रहेगा।
डिजिटल युग में जरूरी कदम
यूरोपीय संघ के एक प्रवक्ता ने कहा कि “डिजिटल युग में यह बदलाव बेहद जरूरी था।” नई व्यवस्था से न सिर्फ सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि पर्यटकों को भी आसान और पारदर्शी यात्रा अनुभव मिलेगा।
पर्यटन और सुरक्षा—दोनों को फायदा
इस प्रणाली से यूरोप आने वाले यात्रियों को तेज और सुगम प्रवेश प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। साथ ही, यह कदम यूरोपीय देशों की सुरक्षा एजेंसियों को गैर-कानूनी प्रवास और अपराध रोकने में भी मदद करेगा।
नई EES व्यवस्था से शेंगेन जोन का इमीग्रेशन सिस्टम अब पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक हो गया है — जो आने वाले समय में यात्रियों और सरकारों दोनों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
