कनाडा में इमिग्रेशन नियमों को सख्त किए जाने का असर अब देश की जनसंख्या पर भी दिखाई देने लगा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में कनाडा की आबादी में 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही यह लगातार तीसरी तिमाही है जब देश की जनसंख्या कम हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कनाडा की आबादी में करीब 55 हजार लोगों की कमी आई और कुल आबादी 41.4 मिलियन रह गई।
स्थायी और अस्थायी निवासियों की संख्या घटी
स्टैटिस्टिक्स कनाडा के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान नए स्थायी निवासियों (Permanent Residents) की संख्या में 20.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अस्थायी निवासियों की संख्या में भी 1.17 लाख से अधिक की कमी आई। इस श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय छात्र और अस्थायी वर्क परमिट धारक भी शामिल हैं। सरकार ने हाल के वर्षों में स्टडी परमिट और वर्क परमिट को लेकर नियमों को काफी सख्त किया है।
इमिग्रेशन कोटा कम होने का असर
कनाडा की इमिग्रेशन एजेंसी IRCC ने 2026 के लिए इमिग्रेशन लक्ष्य को पहले की तुलना में कम कर दिया है। सरकार का उद्देश्य 2027 के अंत तक अस्थायी आबादी को कुल जनसंख्या के 5 प्रतिशत से नीचे लाना है। बढ़ती महंगाई, आवास संकट और सार्वजनिक दबाव को देखते हुए सरकार ने इमिग्रेशन पर नियंत्रण बढ़ाया है।
जन्म दर में भी आ रही गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा की जन्म दर लगातार कम हो रही है। पहले इस कमी को इमिग्रेशन के जरिए संतुलित किया जाता था, लेकिन अब नए प्रवासियों की संख्या घटने से जनसंख्या वृद्धि प्रभावित हो रही है। जानकारों का मानना है कि इसका असर भविष्य में श्रम बाजार और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
दूसरे देशों की ओर बढ़ रहा रुझान
रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा में अवसरों की कमी और सख्त नियमों के कारण कई संभावित प्रवासी अब ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं कनाडा में पहले से रह रहे कुछ प्रवासी भी वर्क परमिट में देरी और सीमित अवसरों के कारण अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
भविष्य की नीति पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कनाडा में आवास और महंगाई से जुड़ी चुनौतियां कम नहीं होतीं, तब तक सरकार इमिग्रेशन नियमों में ढील देने से बच सकती है। ऐसे में आने वाले समय में कनाडा की जनसंख्या और श्रम बाजार की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
