अमृतसर पोस्ट ऑफिस से जुड़ा एक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने भाषा को लेकर नई बहस छेड़ दी। वीडियो में पोस्ट ऑफिस में तैनात एक कर्मचारी ग्राहकों से पंजाबी की बजाय हिंदी में बातचीत करता नजर आया। इसी बात पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और मामला चर्चा में आ गया।
हिंदी में बात करने पर हुआ विरोध
दरअसल, संबंधित अधिकारी ग्राहक से हिंदी में बात कर रहा था और पंजाबी नहीं बोल पा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई और स्थानीय भाषा के इस्तेमाल की मांग की। देखते ही देखते यह मामला सुर्खियों में आ गया।
प्रशासन ने लिया फैसला
मामले को गंभीरता से लेते हुए अमृतसर पोस्ट ऑफिस डिवीजन के सुपरिंटेंडेंट प्रवीण प्रसून ने कार्रवाई की। उन्होंने पोस्टल असिस्टेंट विशाल सिंह का दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया। प्रवीण प्रसून ने बताया कि विशाल सिंह मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है और पिछले चार साल से अमृतसर पोस्ट ऑफिस में सेवाएं दे रहा था।
भर्ती प्रक्रिया पर दी सफाई
सुपरिंटेंडेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि अमृतसर पोस्ट ऑफिस में कई कर्मचारी दूसरे राज्यों से भर्ती होते हैं। इन कर्मचारियों का चयन हिंदी और अंग्रेजी भाषा की जानकारी के आधार पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि डाक विभाग की भर्ती प्रक्रिया पूरे देश के लिए होती है, न कि किसी एक राज्य के लिए।
वीडियो वायरल करना बताया गलत
प्रवीण प्रसून ने यह भी कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का वीडियो बनाकर इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने अपील की कि लोगों को ऐसे मामलों में संयम बरतना चाहिए और शिकायत के लिए उचित मंच का इस्तेमाल करना चाहिए।
भविष्य के लिए नया कदम
इस विवाद के बाद डाक विभाग ने भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एक अहम फैसला लिया है। सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि अब पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों को पंजाबी भाषा पढ़ने और बोलने की बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो और संवाद आसानी से हो सके।
भाषा और सेवा दोनों जरूरी
यह मामला यह भी दिखाता है कि सरकारी सेवाओं में स्थानीय भाषा की अहम भूमिका होती है। प्रशासन का मानना है कि भाषा की समझ बढ़ाकर सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है, ताकि जनता और कर्मचारियों के बीच तालमेल बना रहे।
