08 फरवरी 2026:
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में सर्वदलीय बैठक आयोजित की। इस अहम बैठक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बजट सत्र के सुचारू संचालन और सदन में सकारात्मक चर्चा सुनिश्चित करना रहा।
प्रदेश सरकार की ओर से 11 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा, जिसका कुल आकार इस बार करीब 9 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यदि ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा।
सरकार का मुख्य फोकस इस बजट में प्रदेश के समग्र विकास और आम नागरिकों की सुविधाओं को मजबूत करने पर रहेगा। विशेष रूप से सड़क, पुल, शहरी विकास और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटन किए जाने की संभावना है।
पिछले वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश का बजट लगभग 8.08 लाख करोड़ रुपये का था, जो अपने पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में करीब 9.8 प्रतिशत अधिक रहा। इस बार आने वाला बजट इससे भी बड़ा होगा और इसमें जनकल्याणकारी योजनाओं को और विस्तार देने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार युवाओं के लिए रोजगार सृजन, किसानों की आर्थिक सहायता और गरीब व जरूरतमंद वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान कर सकती है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को और सशक्त बनाने की तैयारी है, ताकि इनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
बजट में कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने, पुलिस आधुनिकीकरण और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य विकास की रफ्तार बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन और संतुलन को भी कायम रखना है।
इन सेक्टरों को मिल सकता है सबसे ज्यादा बजट
अनुमान के मुताबिक—
करीब 25% बजट इंफ्रास्ट्रक्चर पर
15% शिक्षा पर
12% कृषि क्षेत्र पर
8% स्वास्थ्य सेवाओं पर
और लगभग 5% सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जा सकता है
