देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को लेकर इन दिनों नई चर्चा शुरू हो गई है। खबरें सामने आईं कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि क्या अब UPI से भुगतान करना महंगा हो जाएगा। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं होने की बात कही है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को चलाने और मजबूत बनाए रखने में लागत आती है, जिसे किसी न किसी को वहन करना पड़ता है। लेकिन यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि यह खर्च कौन उठाएगा और किस तरह की व्यवस्था बनाई जाएगी।
MDR क्या होता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो आमतौर पर व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देते हैं। अभी UPI और रुपे डेबिट कार्ड के अधिकांश लेनदेन पर यह शुल्क नहीं लिया जाता। इसी कारण UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और यह आम लोगों की पहली पसंद बन चुका है।
किन लेनदेन पर असर पड़ सकता है?
चर्चा केवल ऐसे प्रस्ताव को लेकर है जिसमें ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारिक (Person-to-Merchant) UPI भुगतान पर MDR लगाया जा सकता है। व्यक्तिगत खाते से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे यानी Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन पर किसी तरह का शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है। छोटे व्यापारियों को भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लिए क्यों जरूरी मानी जा रही है नई व्यवस्था?
बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि UPI नेटवर्क को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए लगातार निवेश करना पड़ता है। साइबर सुरक्षा, तकनीकी ढांचे और सर्वर संचालन जैसी कई लागतें बढ़ रही हैं। ऐसे में लंबे समय तक इस व्यवस्था को टिकाऊ बनाए रखने के लिए नए राजस्व मॉडल पर विचार किया जा रहा है। हालांकि सरकार और RBI ने अभी किसी शुल्क या दर को मंजूरी नहीं दी है।
