US-Iran शांति समझौते की उम्मीदें तेज, होर्मुज जलमार्ग खुलने से भारत समेत कई देशों को होगा बड़ा फायदा
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए 14 जून 2026 को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस संभावित समझौते से फरवरी के अंत से जारी संघर्ष के समाप्त होने की उम्मीद बढ़ गई है। युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी और कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था।
होर्मुज जलमार्ग खुलने की संभावना
समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जा रही है कि इसके बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों और तेल टैंकरों के लिए फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस विभिन्न देशों तक पहुंचती है।
भारत को मिलेगी बड़ी राहत
होर्मुज जलमार्ग खुलने से भारत को सबसे अधिक लाभ पाने वाले देशों में गिना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। जलमार्ग खुलने के बाद तेल आयात की लागत कम हो सकती है, माल ढुलाई आसान होगी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घट सकता है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को फायदा
चीन इस मार्ग से गुजरने वाले तेल का सबसे बड़ा आयातक माना जाता है। जलमार्ग खुलने से चीन की ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकेगी। इसके अलावा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि उनकी बड़ी तेल जरूरतें इसी समुद्री मार्ग के जरिए पूरी होती हैं। इससे इन देशों में ऊर्जा संकट की आशंका कम हो जाएगी।
तेल निर्यातक देशों के लिए भी अच्छी खबर
सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिल सकता है। होर्मुज खुलने के बाद ये देश बिना किसी बाधा के अपने प्रमुख ग्राहकों तक तेल और गैस पहुंचा सकेंगे। कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में शामिल है, उसे भी इससे बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।
ईरान की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बूस्ट
यदि समझौते के बाद ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो देश अपने बंदरगाहों से अधिक मात्रा में तेल निर्यात कर सकेगा। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका फिर से बढ़ सकती है।
वैश्विक बाजारों में आ सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलमार्ग के दोबारा सामान्य रूप से खुलने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ेगी। इससे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। साथ ही समुद्री जहाजों के बीमा और परिवहन लागत में भी कमी आने की संभावना है, जिसका असर दुनिया भर में महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।
