अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर सामने आते ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। लंबे समय से जारी तनाव कम होने की उम्मीद से एशिया, यूरोप और अमेरिका के शेयर बाजारों में खरीदारी बढ़ गई। निवेशकों को भरोसा है कि मध्य-पूर्व में स्थिरता आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
शांति समझौते का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार पर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि होरमुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे कीमतों पर दबाव आया है।
होरमुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया था। अब समझौते के बाद इसके फिर से पूरी तरह खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
एशियाई बाजारों में शानदार उछाल
जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में सबसे अधिक उत्साह देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों ने इसे क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना है।
भारतीय बाजार को भी मिला सकारात्मक संकेत
वैश्विक बाजारों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। गिफ्ट निफ्टी में मजबूती दर्ज की गई, जिससे संकेत मिले कि भारतीय बाजार भी सकारात्मक शुरुआत कर सकते हैं। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है क्योंकि इससे आयात बिल कम हो सकता है।
निवेशकों की नजर अगले कदम पर
हालांकि बाजारों में उत्साह है, लेकिन निवेशक अभी समझौते के औपचारिक हस्ताक्षर और उसके क्रियान्वयन पर नजर बनाए हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और व्यापारिक संबंधों जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत होगी।
