बठिंडा के सिविल अस्पताल में हुए लगभग 30 लाख रुपये के तेल घोटाले के खुलासे के बाद अब मामला गर्माता जा रहा है। विजिलेंस विभाग द्वारा जांच शुरू किए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग ने इस घोटाले से जुड़े माने जा रहे तीन कर्मचारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
प्रशासनिक कारण या तेल घोटाले का असर?
स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में इन निलंबनों को “प्रशासनिक कारण” बताया है, लेकिन आंतरिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर तेल घोटाले से जुड़ी हुई है। निलंबित कर्मचारियों में तत्कालीन एस.एम.ओ., सीनियर असिस्टेंट सी.एन.एम. और कंप्यूटर ऑपरेटर जगजीत सिंह शामिल हैं।
30 लाख का घोटाला और फर्जी बिल
इस घोटाले की शिकायत गांव घुड़ा निवासी हरतेज सिंह भुल्लर ने मुख्यमंत्री पंजाब और डीजीपी विजिलेंस को भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अस्पताल के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारियों ने मिलकर करीब 30 लाख रुपये का तेल घोटाला किया।
हरतेज सिंह का कहना है कि डीजल और पेट्रोल के फर्जी बिलों को पास किया गया, यहाँ तक कि ऐसे वाहनों के नाम पर भी तेल लिया गया, जो अस्पताल में थे ही नहीं। कुछ गाड़ियों के नंबर तो रिकॉर्ड में दर्ज तक नहीं थे, लेकिन उनके नाम पर हजारों रुपये का तेल चढ़ा दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री को दी गई थी लिखित शिकायत
हरतेज सिंह ने बताया कि उन्होंने 2 अप्रैल 2025 को यह शिकायत स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को दी थी। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अस्पताल का दौरा किया और जांच की।
हालांकि जांच में गड़बड़ी साबित होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नाराज़ होकर हरतेज सिंह ने विजिलेंस विभाग के डायरेक्टर को शिकायत भेजी। उसके बाद विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा ने जांच शुरू कर दी है।
दस्तावेज जब्त, पूछताछ शुरू
सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस टीम ने अस्पताल से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और अब संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
हरतेज सिंह का यह भी दावा है कि अस्पताल में डोप टेस्ट और मरीजों की पर्चियों से जुड़े मामलों में भी वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। अब देखना यह होगा कि विजिलेंस विभाग की जांच में और कौन-कौन से खुलासे सामने आते हैं।
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
