राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली AIIMS में इलाज के दौरान मौत हो गई। तन्वी को बचपन से ही दिल की गंभीर बीमारी थी और उसके परिवार के मुताबिक, करीब 13 साल तक वह इलाज और सर्जरी की उम्मीद में AIIMS के चक्कर लगाता रहा। परिवार का आरोप है कि अगर समय पर सर्जरी हो जाती तो बेटी की जान बच सकती थी।
दिल में छेद के साथ जटिल बीमारी
रिपोर्ट के मुताबिक तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या थी। इस स्थिति में दिल में छेद के साथ फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली नसों में भी गंभीर परेशानी हो सकती है। 2013 में तन्वी का सर्जरी के लिए मूल्यांकन किया गया था।
2018 में सर्जरी को माना गया जोखिम भरा
AIIMS के डॉक्टरों के अनुसार, 2018 की जांच में तन्वी के फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली मुख्य नसों की स्थिति बेहद जटिल पाई गई। डॉक्टरों ने उस समय सर्जरी को उचित नहीं माना और दवाओं के जरिए इलाज जारी रखा गया। बाद में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर विचार किया गया।
ट्रांसप्लांट की तैयारी के दौरान बिगड़ी तबीयत
तन्वी को 24 अगस्त को AIIMS में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के मूल्यांकन के लिए भर्ती किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, मंगलवार तड़के उसकी ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरा और उसे कार्डियक अरेस्ट हुआ। उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
परिवार ने इलाज में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि AIIMS का कहना है कि इस मामले में सर्जरी पहले ही जोखिमपूर्ण मानी गई थी।
